रवी ज़करिया यूरोप, मध्य-पूर्व और अमेरिका के सवालों का जवाब देते हैं – प्रोग्राम 3

रवी ज़करिया यूरोप, मध्यपूर्व और अमेरिका के सवालों का जवाब देते हैंप्रोग्राम 3

 

आज द जॉन एन्करबर्ग शो में डॉक्टर रवी जकर्याह दोष निकालनेवालों को जवाब देते हैं/

रवी भारत में पले-बढ़े, जहाँ इनके पूर्वज याजकों में ऊँची जाती के थे, लेकिन एक दिन इन्होने यीशु मसीह के वचनों को सुना और विश्वासी बन गए, और अब ये संसार में सबसे बुद्धिमान मसीही अपोलोजिस्ट हैं, 70 से भी ज्यादा देशों में यात्रा की हैं, और बहुत सम्मानित यूनिवर्सिटीज में वक्ता रहे हैं,जिन में हैं, हारवर्ड, प्रिंस्टन, डार्टमाउथ, जॉनस होपकिन्स और ओक्स्वार्ड यूनिवर्सिटी में भी/ ये दक्षिण अफ्रीका में पीस अकॉर्ड को भी संदेश देते हैं, और मिलटरी अफसरों को भी लेनन मिलटरी अकैडमी में, सेंटर फॉर जिओपोलिटिकल स्ट्रेटजी मास्को में/

तीन बार इन्हें न्युयोर्क में युनायटेड नेशन के एन्युअल प्रेअर ब्रेकफास्ट मीटिंग में बुलाया गया/ और इन्होने नेशनल प्रेअर ब्रेकफास्ट में सिट ऑफ गवरमेंट ओटावा, केनडा में भी संदेश दिया है, और लन्दन इंग्लैंड में, और सी आय ए वाशिंगटन डी सी में भी वक्ता रहे हैं, आज हमारे साथ जुड़ जाए विशेष प्रोग्राम द जॉन एन्करबर्ग शो में/

 

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डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     प्रोग्राम में स्वागत है, मैं हूँ जॉन एन्करबर्ग, आज हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद, और मेरे मेहमान हैं जो आपने सुना है, बुद्धिमान फिलोसोफर, थियोलोजियन, मसीही अपोलोजिस्ट डॉक्टर रवी जकर्यास और इन्होने बहुत से विद्यार्थियों से बातें की हैं, लाइव में, यूनिवर्सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों से पूरे संसार में, और हमने पहले ही देखा है पुर्वीय देशों के सवाल, मध्य-पूर्व को, पिछले हफ्ते यूरोप को और आज हम वो सवाल देखेगे जो रवी से पूछे गए परमेश्वर और बाइबल में यीशु के बारे में, ऐसी जगह जैसे होवार्ड, डार्टमिथ, प्रिन्सटन और दूसरी जगह पर, और रवी मैं खुश हूँ आप यहाँ हैं,

और यहाँ पर पहला सवाल है, यहाँ अमेरिका के विद्यार्थियों से, ये कैसे हो सकता है कि सर्वसामर्थी परमेश्वर और प्रेमी प्रभु, इस संसार में बुराई आने दे सकता, खासकर जब कि वो पहले से ही जनता था, कि उसने संसार बनाने के बाद संसार नाश हो जाएगा/ और विपत्ति आएगी और बीमारी आएगी, और हम दु:ख सहेंगे/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  मैं सोचता हूँ जॉन कि ये कटीला सवाल है, सच में ऐसा है जो शायद बहुत से लोग पूछते हैं, किसी ने इन शब्दों में कहा, निराशा में भलाई, विजय ए युक्ति ने मनुष्य जाती को नास्तिक बना दिया/ और जो अल्फ्रेड लॉर्ड टेनिसन ने कहा, सुबह से शाम तक कुछ ज्यादा नही होता, लेकिन कुछ दिल टूट जाते हैं, ये तो, ये तो दर्ददायी सवाल है, अपने आप में क्योंकि ये दर्द से व्यवहार करता है/ दर्द असली बात है, ये कल्पना की बात नही है/

बहुत से तरीके से कोई जवाब तक पहुंच सकता है, लेकिन सी एस लुईस हमें याद दिलाते थे, कि ये बहुत महत्वपूर्ण है कि अनुमान को सवाल के साथ जाँच ले/ मुझे याद है कईसाल पहले यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉटिंगम में, जब मैंने लेक्चर खत्म किया और एक व्यक्ति खड़े हुए, विद्यार्थी खड़े होकर नीचे से चिल्ला रहे थे और कहा, जानते हैं, इस संसार में बहुत बुराई है, कोई परमेश्वर नही हो सकता, बुराई और दु:ख तो बहुत ज्यादा हैं, इस संसार में, और इस सवाल का मुख्य भाग तो मेरे लिए जानते हैं, मैं पूर्व से आया हूँ, अब पश्चिम में रहता हूँ, मुझे याद नही कि पूर्व में किसी ने मुझ से ये सवाल पूछा/ अब वो पूछते हैं, क्योंकि सोच विचार की लेन-देन हो रही है, और ये सब, लेकिन मुश्किल से किसी ने पुछा होगा, दूसरी आस्था में शायद ही कोई किताब हो जो इस विषय पर बताती हो, कहते हैं, प्रभु चाहे तो, ये प्रभु की इच्छा है, और देखीए, पैन्थीइस्टिक प्रणाली में, काम है, हम अपने कर्ज चूका रहे हैं, हम तो पश्चिमी संसार में बहुत आराम से रहते हैं, कि हम दर्द और दु:ख के बारे में सवाल उठाते हैं/

लेकिन इस इंग्लिश आदमी ने ये सवाल उठाया, तो मैंने उनसे कहा, मैं पहले ये स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आप ये सवाल क्यों पूछ रहे हैं, और आपके अनुमान क्या हैं? मैंने कहा जब आप बुराई कहते हैं तो सोचता हूँ कि अनुमान लगा रहे हैं कि भलाई भी है/ वो रुके और कहा, जी, मैंने कहा जब आप भलाई का अनुमान लगा रहे हैं, तो आप अनुमान लगा रहे हैं कि नैतिक व्यवस्था है/ जिसके आधार पर हमें भले और बुरे का फर्क बताना है/ वो इससे उलझ रहे थे और हम चर्चा कर रहे थे, और अंत में कहा जी, निश्चय ही नैतिकता के कुछ स्थर होने चाहिए,जिससे हम भले और बुरे का फर्क जान पाए/ मैंने कहा जब आप कहते हैं कि नैतिक नियम हैं, तो हमें नैतिक नियम देनेवाले के बारे में सोचना होगा, लेकिन आप इसे ही सही नही गलत कह रहे हैं/ क्योंकि कोई नैतिक नियम देनेवाला नही है, तो कोई नैतिक नियम नही हैं, कोई नैतिक नियम नही तो कोई भलाई नही, यदि भलाई नही तो बुराई नही, तो आपका सवाल क्या है?

और वो मेरी ओर देखकर कुछ समय रुके और कहने लगे, तो मैं आप से क्या पूछ रहा हूँ? अब ये कई साल पहले की बात है, मुझे पता है कि आप क्या पूछ रहे हैं, और मैं इसे आपके लिए मुश्किल नही बनाऊंगा, ये तो अस्तित्व में रहते हुए महसूस किया गया सवाल है/ जो अकसर इसके अंदर के पहले से अस्तित्व में रहनेवाली अपेक्षाओं को नही देखता, परमेश्वर को इस ढ़ांचे में रहना होगा, कि ये सवाल असली हो जाए/ इसलिए जवाब वहां से आएं जो परमेश्वर का वास्तविकता के बारे उद्देश है और उसका विवरण है/

हालही में मैंने एक किताब मिलकर लिखी है विन्सी विटाली के साथ,ऑक्सफ़ोर्ड से मेरे कलिग, हमने इसका नाम दिया दु:ख क्यों/ मेरा ओपनिंग चैप्टर था नाम है ट्रायलेमा, परमेश्वर सर्वसामर्थी है, परमेश्वर बड़ा प्रेमी है, और बुराई है/ यही ट्रायलेमा है, तीन वास्तविकता जिसे जे एल मैकी, ऑस्ट्रेलियाई फिलोसोफर ने कहा, ये तो अटल है, परमेश्वर सर्वसामर्थी है, परमेश्वर प्रेमी है, बुराई का अस्तित्व है, उन्होंने कहा कि ये अटल बात है/ तो मेरा सवाल है कि ये ट्रायलेमा क्यों है/ और ये क्वाड्रिलेमा नही, या क्विंटलेमा नही, एक और बात बता दूँ, परमेश्वर सर्वज्ञानी है/ हमारे पास ये भी विश्वास है/ और नंबर 5 परमेश्वर अनंतकाल का है/ परमेश्वर केवल समय में सब का न्याय नही करता है/ वो अनंतकाल का है, याने ये ऐसा नही, देखी सवाल जमा होता है, जब जमा होता है, ट्रायलेमा के रूप में, परमेश्वर सर्वज्ञानी है और अनंतकाल भी वास्तविकता के रूप में होता है/ और शायद ये विवरण अनंतकाल में आ सकते हैं/

चलिए मैं इसमें जल्दी से दो जवाब देता हूँ/ एक छोटी बच्ची है,जॉर्जिया में, जहाँ मैं रहता हूँ, मैं अटलांटा में रहता हूँ, और देखीए उसका पहला नाम एशलिन है, और एक दिन उसकी माँ टेलीविजन प्रोग्राम पर थी, और अजीब समस्या के बारे में चर्चा कर रही थी, जिसे सीपा कहते हैं, कन्जनीशल इन सेंसिटिविटी दर्द और एन्थीरोसिस के लिए/ उसे दर्द महसूस नही होता और उसके स्वेट ग्लैंड्स काम नही करते हैं, समस्या ये है कि अच्छा सुनाई देता है कि दर्द महसूस नही होता है/ लेकिन सच्चाई तो ये है, यदि वो खेलते हुए कील पर पैर रख दे, तो वो पैरों में चूभ जाएगा, किसी तरह का इन्फेक्शन लाएगा और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा/ माँ ने कहा कि इसके कारण उसके जीवन में जो समस्या आई, ये बात जो उसके शरीर ले लाती है, वो कहती है कि मैं हर रात एक ही प्रार्थना करती हूँ, परमेश्वर कृपया मेरी बेटी को दर्द महसूस करने दे/ वो बर्नर पर अपना हाथ रख सकती है, और नही जानेगी कि उसका हाथ जल रहा है/

अब मेरा सवाल ये है, यदि हमारी इतनी सीमित बुद्धि में, हम दर्द की भूमिका को देख सकते हैं, कि हमें चेतावनी दे कि कुछ गलत है/ क्या ये परमेश्वर के लिए असंभव है कि अपनी असीमित बुद्धि में, कि हमारे जीवन में दर्द आने दे, जिससे हम जान सके, कि कुछ गलत है/ दर्द को मनुष्य के ढ़ांचे में नैतिक शब्दों में बता सकते हैं, ये इसलिए कि हम नैतिक लोग हैं, इसलिए जवाब तो आना चाहिए, आत्मिक ढ़ांचे से ही, साथ ही इस सवाल में नैतिक कारण की बात है, इसका केवल अनुमान तब होता जब परमेश्वर इस ढ़ांचे में होगा और इससे बाहर नही होगा/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     जी, आपने ये भी कहा था कि केवल 3 या ४ पर्याय हैं, इस अस्तित्व के लिए जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं, हमें ये पर्याय बताए कि लोग इसे सुन सके/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  जी, मैं सोचता हूँ कि इसे इस तरह से देख सकते हैं, नंबर एक परमेश्वर कुछ भी नही बना सकता था, संसार की चार संभवनाओं में से ये एक है, परमेश्वर कुछ भी नही बना सकता था, तो हम उस पर दोष लगाने के लिए वहां पर नही होते, और वो खुद अस्तित्व में रहता और ये सब, नंबर दो, परमेश्वर ऐसे संसार को बना सकता था जिस में किसी तरह से कोई बुराई और भलाई नही होती, ये बिना नैतिकता का संसार होता/ नंबर तीन, परमेश्वर ऐसे संसार को बना सकता था जहाँ  हम केवल भले को ही चुन सकते थे, प्रोग्राम्ड होते कि केवल भला ही करे, या नंबर चार, परमेश्वर इस संसार को बना सकता था जहाँ भलाई और बुराई की संभावना होती है, और फिर हम भलाई को चुनते जो हमारे लिए अच्छा है/

चौथा संसार ही, केवल एक मात्र संसार है, जॉन, जिसमे प्रेम संभव है, बाकि तीन बातों में प्रेम की संभावना नही है/ कोई संसार नही बनाता, मरणहार जीवों के लिए कुछ नही होता, तो वो कैसे प्रेम करते, यदि बिना नैतिकता का संसार होता, जहाँ कोई भलाई-बुराई नही होती, तो प्रेम सबसे बड़ा नही होता/ जहाँ हम केवल प्रेम को चुने तो ये चुनाव नही है/ ये तो प्रोग्राम्ड है, तो आप मशीन जैसे होगे, या ये संसार जहाँ भलाई और बुराई संभव है, और प्रेम का चुनाव किया जा सकता है/ यदि प्रेम सबसे महान नियम है/ जो कि ये है, तो महान रूप में देनेवाला प्रेम तो महान प्रेम है, जहाँ कईबार आप अपने जीवन को जोखिम में डालकर बचाते हैं, पूरी तरह अजनबी को बचाते हैं, ये महान रूप में देनेवाले प्रेम का काम, जहाँ प्रेम देखा गया अपने सबसे बड़े रूप में/ ये सारी वास्तिविकता तो केवल इस संसार में संभव है/

और फिर मैं सच में एक और बात बताना चाहता हूँ, जॉन, जब आप संसार के दूसरे दृष्टिकोण पढ़ते हैं, मेरी किताब दु:ख क्यों में मैंने बताया कि दूसरे दृष्टिकोण में लेखक क्या कहते हैं, केवल यहूदी मसीही संसार में, सच में एक जवाब है/ पाप से बाहर निकाला गया, और भीतर चंगाई आती है, परमेश्वर तसल्ली देता है/ एक बहन कि बायोग्राफी मैंने पढ़ी थी, एनी जॉनसन फ्लिन्ट, जिन्होंने बहुत दु:ख उठाया था, उन्हें रुमोतोइड अर्थराइटिस था, कैन्सर, अंधापन, और वो कईसाल तक अपने आस-पास केवल तकिया लेकर ही रही, शरीर पर बहुत फोड़े थे, और उन्होंने बहुत से गीत लिखे, उन में से एक गीत ये है/

जब बोझ बहुत बढ़ जाता है तो वो ज्यादा अनुग्रह देता है/

जब दर्द बढ़ जाता है तो वो ज्यादा बल देता है/

क्लेश बढने पर वो दया भी बढ़ाता है/

परीक्षा बहुगुणित हो तो वो शान्ति बहुगुणित करता है

लेकिन हम अपने सहने की शक्ति का भंडार खत्म कर देते हैं

जैसे दिन अधुरा होता है और हमारा बल खत्म हो जाता है,

जब हम अपने स्रोतों के अंत तक पहुंचते हैं,

तो हमारे पिता का देना तो अब बस शुरू हो गया है,  

उसके प्रेम की कोई सीमा नही है, उसके अनुग्रह का कोई नांप नही

उसके सामर्थ की कोई भी सीमा मनुष्य को पता नही

यीशु में उसके अद्भुत धन में से,

वो देता और देता और देता है, फिर देता है

परमेश्वर हमें दर्द और दु:खों में संभाले रहता है/ जब मेरी पीठ में मुझे चोट लगी थी, मैं ऐसे दर्द के साथ रहा जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नही था कि इतना हो सकता है/ मैं अपनी कार में कभी बैठता और स्टारिंग व्हील पर अपना सिर रखकर रोते रहता, क्योंकि तीन हरनीएटेड डिस्क थी और मुझे पता नही था कि मैं इसके साथ कैसे आगे जा रहा हूँ/ लेकिन मैं आपको बताऊ इसने मुझे बताया कि प्रभु का अनुग्रह काफी है/ और उसने मुझे सदा के लिए उस पर आधारित रहनेवाला बना दिया/ इसके प्रभाव में दर्द तो जीने के लिए परमेश्वर का न्योता हो सकता है/

एक और बात, अब इन तीनों में, विश्वास, आशा और प्रेम में, और इन सब में सबसे महान प्रेम है/ ये जीवन की तीन सबसे बड़ी बात होती है/ ये दु:ख के बिना असंभव है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     रवी ये बहुत ही अच्छा है, मैं चाहता हूँ कि आप कुछ पल के लिए रुककर लोगों से कहे, जैसे मैं दु;ख उठाता हूँ आपके जैसे, दूसरों के जैसे, कुछ तो विहिल चेअर पर हैं, कुछ तो बिस्तर पर पड़े हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए क्या कह सकते हैं?  

डॉक्टर रवि जकर्याह:  और मैं सोचता हूँ कि ये बहुत असली है जॉन, जानते हैं मैं महान सोचनेवालों के देश से आया हूँ/ महान बातें हैं, भारत फिलोसोफर लोगों का महान देश है/ मैं हमेशा परमेश्वर का आभारी रहा हूँ, कि मेरी परवरिश ऐसे देश में हुई जहाँ हम ये सवाल पूछ सकते हैं/ लेकिन साथ ही इस में बहुत दु:ख उठाना भी है/ दर्द भी है, मेरी माँ इसी तरह आई थी, उसने अपनी बड़ी बहन को अपनी आँखों के सामने जलते हुए देखा था, उनकी साड़ी उस चूल्हे में गिर गई जिस में वो कहना पका रही थी/ हालही में मैं जले हुए लोगों के हस्पताल में था, आप जो देख रहे हैं, शायद आप दु:ख उठा रहे हैं, शायद दर्द में हो, शारीरिक, भावनात्मक, आपका घर टूटने पर है, शायद आप से बुरा व्यवहार किया गया है, आप उस रैंक में नही हैं जो आप होना चाहते हैं, और अपने अंदर से आप चिल्ला रहे हैं/

यीशु मसीह को पुकार उठे कि आपको संभाले रहे, और आपको तैयार करे, यीशु मसीह ने दर्द की समस्या के बावजूद विजय प्राप्त नही की, उसने उस में से होकर विजय पाई है, उसने उसमें से होकर विजय पाई है, और क्रूस की यही कहानी है, और आपके दर्द के द्वारा शायद आप पाएगे कि परमेश्वर आपके दिल पर विजय पा रहा है/ वो केवल आपका उद्धार ही नही होगा, लेकिन आपका उद्धारक नही होगा, आपका सान्तवना देनेवाला होगा, चंगाईदाता, नया बनानेवाला होगा, यीशु कौन है यही तो इसका सत्य है/ वो हमारे अपराधों के लिए घायल किया गया, हमारे अधर्मों के लिए कुचला गया, और उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     दोस्तों ये ऐसे शब्द हैं जिन्हें मानो बैंक में ले जा सकते हैं, आप इन शब्दों से जी सकते हैं, और मैं चाहता हूँ कि रवी बताए कि क्या त्रिएकता मतभेद की है?

हम चर्चा कर रहे हैं, जो विद्यार्थियों से इनसे पूछे थे, यहाँ अमेरिका में, ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब पाना आप सुनना चाहते हैं, और रवी ये सवाल है, विद्यार्थियों ने पूछा, मतभेद न करने के नियम के बारे में क्या, मुझे लगता है कि मसीहियत अपने केंद्र में, मतभेद न करने के सिद्धान्त का उलंघन करती है/ परमेश्वर के बारे में मसीही सिद्धान्त दावा करता है कि परमेश्वर एक है और तीन भी है/ क्या मसीही लोग मतभेद न करने का ये नियम तोड़ रहे हैं?

डॉक्टर रवि जकर्याह:  अच्छा सवाल है और मैं सोचता हूँ कि हम विश्वासी इसके बारे में बहुत सोचते हैं, और खासकर यदि हम मध्य-पूर्व में हैं तो ये बहुत असली बात है, अविश्वासी लोगों में जो सोचे हैं कि हम बहुत ईश्वरों को मानते हैं, और यहाँ पश्चिम में ये विरोध न करने के नियम के उलंघन के रूप में देखते हैं, यहाँ दो या तीन बातें जो यहाँ पर डॉ बैक के जैसी हैं, जॉन, कि सुननेवाले समझ जाए और सबसे पहली बात तो ये है, जब हम परमेश्वर के बारे में कहते हैं, जब हम परमेश्वर के बारे में भाषा का उपयोग करते हैं, थोमस एकवायन्स इस में अच्छे थे जब उन्होंने कहा, तीन तरीके से हम भाषाओँ का उपयोग कर सकते हैं, युनिवक्ली, इक्विक्ली  और एनोलोजिक्ली/

युनिवक्ली का अर्थ है जब हम एक ही शब्द का उपयोग करते हैं, दो अलग वाक्य में, तो इसका एक ही अर्थ होता है/ याने जब मैं आप से कहता हूँ कि मैं आप से प्यार करता हूँ और आपके सारे दोस्त आप से प्यार करते हैं, आप तुरंत ही इसे एक ही बात और एक ही शब्द समझते हैं,

लेकिन फिर आता है इक्विवोकेशन, मैं कहता हूँ मैं आप से प्यार करता हूँ जॉन, और परमेश्वर भी आप से प्यार करता है, मैंने एक ही शब्द का उपयोग किया है/ अचानक आप यहाँ फर्क देते हैं कि मेरा सही में क्या अर्थ है/ परमेश्वर तो आप से अलग तरह से प्रेम करता है, मैं जैसे प्रेम करता हूँ उससे अलग, आप कहेगे यहाँ  इक्विवोकेशन है, ये मुझे ये जानने में मदत करता है, कि आप उसी शब्द का उपयोग कर रहे हैं/

एक्वायनस ने कहा कि अनोलोजिकल उपयोग है जिससे हम परमेश्वर के बारे में भाषा का उपयोग करते हैं, याने मैं कहूँ कि आप से प्यार करता हूँ और आप मुझ से प्यार करने से इनकार करते हैं, तो मुझे दु:ख होगा, मुझे दु:ख होगा क्योंकि मैंने कुछ खोया है, लेकिन यदि मैं कहूँ परमेश्वर आप से प्रेम करता है, और आप प्रभु से प्रेम नही करते तो प्रभु को भी दु:ख होगा/ लेकिन मैं कहूँगा जॉन प्रभु अलग कारण से दु:खी होता है/ मुझे दु:ख होगा क्योंकि मैंने कुछ खोया है/ लेकिन जब प्रभु को दु:ख होता है तो इसलिए कि अपने कुछ खोया है/ ये एनोलोजीकल उपयोग परमेश्वर के बारे में सवाल को पूरी तरह से उठाता है इसलिए, अक्वायन्स ने कहा कि कईबार परमेश्वर तो जवाब से बढकर सवाल होता है, कि उसे समझ सके/

तो मैं यही कहूँगा, जब हम त्रिएकता के बारे में कहते हैं, वो एक तरह से एक है, और तीन अलग तरह से है/ वो एक ही तरह से एक और तीन नही है/ मैं ये क्यों कहता हूँ, परमेश्वर शारीरिक मात्रा या कोई प्राणी नही है/ आप और मैं शारीरिक व्यक्ति हैं, हम एक और तीन शारीरिक रूप में कहते हैं/ परमेश्वर अपने आप में आत्मिक व्यक्ति है/

इसलिए जब हम पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के बारे में कहते हैं, सी एस लुईस इस तरह से कहते हैं, उन्होंने कहा कि यदि एक डायमेंशन है तो लाइन पा सकते हैं, यदि दो डायमेंशन हैं तो चित्र बन सकता हैं, यदि तीन डायमेंशन है तो ऑब्जेक्ट होता है/ उन्होंने कहा हम डायमेंशन की श्रमता में जितना बढ़ते जाएगे, आपके पास वही बुनियादी जानकारी होगी, लेकिन बहुत उलझी हुई बातों में, जैसे आप हर डायमेंशन में बढ़ते जाते हैं/

परमेश्वर इस गिनती करनेवाले डायमेंशन में नही है, वो अगणित व्यक्ति है/ चेले तो मछवारे थे वो जानते थे कि एक मछली और तीन मछली समान नही हैं, वो उनकी मात्रा में फर्क को जान सकते थे/ लेकिन जब वो त्रिएकता के सत्य में आएं, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा, पिता जो पुत्र को भेजता है, पिता और पुत्र जो पवित्र आत्मा को भेजनेवाले हैं, वो इस सच्चाई के बेचिदा होने को समझते हैं कि ये क्या था, परमेश्वर संबध में व्यक्ति है, और मैं सोचता हूँ कि ये चाबी है कि वो संबंधों का व्यक्ति है/

अब वापस जलते हैं, एक और तीन के एब्सट्रेक्ट नोशन में, ग्रीक फिलोसोफर की सबसे बड़ी मनसा तो विविधता में एकता खोजना था/ उन्होंने मनसा के रूप में एकता देखी और विविधता को वास्तविकता के रूप में देखा/ इसलिए उन्होंने यूनिवर्सिटीज़ बनाई/ कि विविधता में एकता देखे, इसलिए अमेरिका बनाया गया, ई प्लोरिबस उन्नम, बहुतों में से एक, लेकिन पढाई में वो एक बात नही पा सके, हम एकता और विविधता को मनसा के रूप में देखते हैं/ क्योंकि विविधता में एकता तो पहला कारण है, त्रिएकता के समाज में विविधता में एकता/

परमेश्वर संबंध में रहनेवाला व्यक्ति है/ इसलिए हम सम्बन्ध के लिए भूखे होते हैं/ वो भूख हम में बोई गई है, चाहे पति हो, पत्नी हो, या दोस्त या माता-पिता और बच्चे हो, ये सब वास्तिविकता है, तो मैं कहता हूँ यदि परमेश्वर संबंध में नही होता, तो परमेश्वर प्रेम है ये कहने का क्या अर्थ होता है, या जब कहते हैं कि परमेश्वर ने कहा है, वो किससे बातें कर रहा है, वो किससे प्रेम करता है, वो तो ऐसे ही अकेले रहता जहां उसे प्रेम और बातचीत को दर्शाने के लिए किसी की जरूरत है/

मैं सोचता हूँ कि हमें  वैसे ही जीना चाहिए, जैसे मोरटीमेर अडलेर ने कहा है, परमेश्वरत्व के भेद  और उलझे होने और प्रताप के भेद में, कि वो इस संबंध में है जो हम से प्रेम करता है/ और इसमें अधिकार के क्रम की वास्तिविकता है, ये भी सही दृष्टिकोण है, मेरे लिए त्रिएकता तो केवल सुंदर जवाब ही नही है, मैं सोचता हूँ कि ये फिलोसोफर और अनुभव की मनसा का सबसे बड़ा विवरण है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     जी, महान जवाब है और मैं चाहता हूँ कि आप इसे देखते जाएं, इस कहानी या दृष्टान्त से जो आपने बताया है, अलग अलग जगह पर, जो ये बताता है कि ये सुसमाचार क्या है, दूसरे शब्दों में, मैं यही कहूँगा, डेजर्ट पिट का दृष्टान्त/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  जी, ये हमेशा मुझे याद दिलाता है, जानते हैं, मेरी पत्नी मुझ से कहती है कि संगीत के बारे में मेरा स्वाद सन 60 में ही खत्म हो  गया है, हर तरह का संगीत और जो गीत मैं गुनगुनाता हूँ, सच में, यहाँ तक भारत में, जो लोग भारत से सुन रहे हैं, आप जानते हैं, कुछ विख्यात गीत, चाहे मुहम्मद रफी के, या मन्ना डे या लता मंगेशकर ये सब महान गानेवाले थे, भारत में सन 60 के दशक में, और यहाँ पर थे अच्छे गायक जैसे प्रेस्ली और दूसरे गायक जो अच्छा गाते थे/

लेकिन जैसे मैं एक नौजवान के रूप में दिल्ली में सुन रहा था, एक गीत जो किंगस्टन ट्रियो का गीत था, जिसका नाम था डेजर्ट पिट, ऐसे मनुष्य के बारे में कह रहा था जो रेगिस्तान से जा रहा था, और वो अपने कंधे पर पानी की बोतल ले जा रहा था, और फिर जाना कि पानी खत्म हो गया, और पानी न मिलने से वो मरनेवाला था, तो वो पंप देखता है और चलकर जाता है, मैं इन बातों को छिपे अर्थ के साथ सुन रहा था/

वो पंप की ओर देखता है और वो पानी की अपेक्षा करता है, और हैन्डल उठाता है, बस धातु पर टकराने की आवाज़ आती है, पानी नही था/ फिर वो देखता है कि नल के पास टिन का डिब्बा लटका था, और उस टिन कैन के अंदर एक पेपर था, और उस पर संदेश था, प्यारे मुसाफिर, निराश न हो, यहाँ बहुत पानी है, बस निर्देश का पालन करना, नल के नीचे देखना रेत है, उसे निकालो, रेत के नीचे पानी की एक बोतल है, वो भरी होनी चाहिए/ इसे मत पीना, इसे सिलेन्डर में खली करना और साथ ही, पंप करते रहना, और सक्शन सिस्टम काम करने लगेगा, और पानी बहते हुए बाहर आएगा, तुम्हें जितना पानी पीना है पिलेना, जितनी बोतल भरना है भर लेना, लेकिन इस बोतल को भरकर आनेवाले अगले व्यक्ति के लिए नीचे रखना न भूलना/ चेतावनी, तुम्हारी परीक्षा होगी कि इस बात पर भरोसा न करे और इस एक बोतल को पीले, क्योंकि तुम इसे देखकर महसूस कर सकते हो/ तुम्हें जल्दी ही प्यास लगेगी, और आनेवाले बाकि लोगों को भी, जो आते हैं, जैसे मैंने तुम्हें बताया इसे खाली कर देना, तुम्हें जितना पानी चाहिए मिलेगा और अगले मुसाफिर को भी मिलेगा, दस्तखत डेजर्ट पिट/

जानते हैं, ये हमारे प्रभु के दस्तखत जैसे हैं, ऐसे देश में जहाँ हम भूखे और प्यासे हैं, आशा और उध्दार के लिए/ वो हमें बताता है कि हमारे पास चुनाव है, हम अपने जीवन को खुद खत्म कर सकते हैं, और हम कहाँ जाएगे? देखीए संसार में सबसे अकेला व्यक्ति वो नही जो दर्द का मारा है/ या जिसे कोई आनंद नही मिला है, जाने के लिए कोई जगह नही है/ हम खाली ही होते हैं, यीशु ने कहा अपना जीवन मेरे हाथों में खाली करो, मैं तुम्हें अनंतजीवन दूंगा, यदि तुम खुद इसे खत्म करोगे, तो तुम जल्दी ही प्यासे हो जाओगे, तुम जल्दी ही अर्थ को खोजनेवाले होगे, सब खत्म होगा, कुँए पर आई स्त्री से उसने यही कहा था/ मैं तुम्हें जल दे सकता हूँ कि तुम फिर कभी प्यासी न हो/

तो सुननेवालों से मैं ये कहता हूँ, क्या आप खुद से ईमानदार हैं, अपनी खोज में,कि आप सच में अर्थ और उद्देश के साथ जीना चाहते हैं? आप के पास कितना भी धन हो, चाहे जितनी भी पढाई हो, ये आपको कहाँ लाता है/ अपने अंदर गहराई से आप सबसे अर्थपूर्ण संबंध की अपेक्षा करते हैं, ये यीशु मसीह के साथ आपके संबंध में आएगा, खुद को समर्पित करे, अपना जीवन उसके हाथों में दे दे/ यही तो डेजर्ट पिट के दृष्टान्त की कहानी है/ यीशु मसीह के साथ हमारे जीवन की यही कहानी है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     जी, मुझे  ये कहानी पसंद है और हमारे पास कुछ मिनट बाकि हैं, अब भारत में जो लोग देख रहे हैं उनके बारे में सोचिए, यूरोप में दूसरी जगह पर जो लोग हैं उनके बारे में सोचिए, और नीचे अफ्रीका में, और मैं चाहता हूँ कि आप उन्हें बताए क्योंकि शायद वो गडबडी में हो, ठीक है वो जानते हैं कि यीशु मसीह ऐतिहासिक व्यक्ति था, और वो केवल इतना ही जानते हैं, वो जानना चाहते हैं कि ये मुझ पर कैसे प्रभाव डालता है, कि वो जीवित है, और शायद आप इसे अपनी कहानी में ले जा सकते हैं, आपने कैसे शुरू किया और कैसे यीशु मसीह के साथ संपर्क में आए, मैं चाहता हूँ कि यीशु की ओर लाने में इनकी अगुवाई कीजिए, और एक प्रार्थना कीजिए कि ये अपने जीवन में मसीह को न्योता दे सके/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  जानते हैं कुछ साल पहले, मैं अमेरिका के सबसे खतरनाक जेल में था, जिसे एंगोला जेल कहते हैं, 5000 से भी ज्यादा कैदी वहां हैं, 85 प्रतिशत तो कभी बाहर नही आ सकते हैं, जैसे मैंने उन्हें देखा, और उन से बातें की तो कुछ अद्भुत कहानियाँ बाहर आई, एक ने कहा कि यीशु मसीह के पास आने के लिए उन्हें जेल में जाना पडा/ इसके लिए यही हुआ और वो तो अब पहले से भी ज्यादा आज़ाद हैं, और जैसे मैंने उन्हें देखा तो जाना कि पाप का सबसे बुरा प्रभाव, तो दर्द या शारीरिक कमजोरी में प्रकट नही होता है, लेकिन हमारे दिमाग में होता है, अयोग्य महसूस करना, खुद को कम समझना और गुलामी की आत्मा में चले जाना है/

हम अपनी आत्मा में गुलाम हैं, मैं भी वही पर था, और 17 साल की उम्र में, मैंने यीशु को अपने जीवन में न्योता दिया, और कई साल बाद मैंने देखा कि मेरे पिता ने यही किया, जो भारत में बहुत है प्रभावी व्यक्ति थे, जो एक चर्च की सभा में आए और वेदी के सामने झुक गए, और अपना जीवन मसीह को दे दिया, मेरी पत्नी ने कहा उनकी तस्वीर देखकर वो बता सकती थी कि जब उन्होंने अपना जीवन यीशु मसीह को दिया, वो पहले क्रोधी व्यक्ति थे, बदलकर सबसे कोमल व्यक्ति बन गए/

आप ये प्रोग्राम देख रहे हैं, एक उद्देश के लिए, आप भीतर से गुलाम हैं, हम सब भीतर से गुलाम हैं इसलिए मैं आप से कहता हूँ, क्या आप आजाद होना चाहते हैं, क्या आप वो आज़ादी चाहते हैं जिसके लिए परमेश्वर ने बनाया है, और आपको आकर दिया है/ यदि ऐसा है तो क्यों न आप मेरे साथ अपना सिर झुकाए और मेरे साथ एक समय एक लाइन की प्रार्थना कीजिए,वो आज़ाद करनेवाला है, वो छुड़ानेवाला है, वो आपको भीतर से आज़ाद करता है, चाहे ये कुछ भी हो, केवल अब मेरे साथ सिर झुकाकर प्रार्थना कीजिए/

स्वर्गीय पिता, तूने ,मुझे यहाँ लाया कि तेरी इच्छा को सुनते जाए, ये कोई संजोग नही है, मैं ये प्रोग्राम देख रहा हूँ, क्योंकि टू चाहता था कि मैं यहाँ पर आऊ, आज मैं तुझे पुकारता हूँ, मैं तो भीतर में बंधन में हूँ, मेरे पापों से मुझे आज़ाद कर, मेरे पापों के लिए मुझे माफ कर, मेरी इच्छा ले और इसे अपनी इच्छा बना, मुझे नया ब्यक्ति बना, और मेरा जीवन तेरे नक्शेकदम पर चले, मुझे तेरी जरूरत है, मैं तुझे चाहता हूँ, मैं तुझे समर्पित होता हूँ प्रभु यीशु, मेरा उद्धारक हो जा, अब से आगे, मेरी प्रार्थनाओं का जवाब देने के लिए धन्यवाद, तेरे पवित्र नाम में मैं इसे मांगता हूँ, आमीन/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:     अद्भुत है रवी और दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपने ये प्रार्थना की है, या अभी भी इसके बारे में सोच रहे हैं, ये ठीक है, हमारी वेबसाइट पर आप एक जगह पाएगे, जे ए शो डॉट ओर्ग पर, जहाँ ये लिखा है, प्रार्थना कर यीशु को अपना उद्धारक स्वीकार करे, इस में उसके बारे में ज्यादा जानकारी दी गई है, लेकिन साथ ही प्रार्थना का ढांचा दिया गया है कि आप प्रार्थना कर सके, यदि आपने ये प्रार्थना की है, तो कुछ प्रेरणा है कुछ प्रतिज्ञाएं हैं आपके लिए, कि कैसे प्रभु यीशु के साथ रह सकते हैं, आप सबकुछ नही जानते हैं, आपने उसकी सामर्थ और सबका अनुभव नही किया है, तो बस कदम ब कदम आगे बढ़े, प्रभु आप से प्रेम करता है और वो आपके अंदर काम करेगा, आप जहाँ भी हैं वही/

रवी मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, कि आप अपने व्यस्थ समय में आएं, और आप यहाँ आकर इन 6 प्रोग्राम में चर्चा की, हमारे सभी दर्शकों के साथ, और मैं सराहना करता हूँ आपकी बुद्धिमत्ता की और ये सारा समय जो आपने रखा उन मुश्किल सवालों का जवाब ढूंडने में, और आपकी हिम्मत कि पूरे संसार के दर्शकों के सामने ये कहे, और मैं आशा  करता हूँ कि भविष्य में आप फिर आएगे,

और दोस्तों यदि आप जानना चाहते हैं कि ये सारी जानकारी कहाँ से पाए जो रवी ने इन 6 प्रोग्राम्स में बताई हैं, बहुतसी जानकारी हैं, तो बने रहिए, हम जल्दी ही आपको बताएगे/

 

जॉन एन्करबर्ग शो

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