रवी ज़करिया यूरोप, मध्य-पूर्व और अमेरिका के सवालों का जवाब देते हैं – प्रोग्राम 2

रवी ज़करिया यूरोप, मध्यपूर्व और अमेरिका के सवालों का जवाब देते हैंप्रोग्राम 2

 

आज द जॉन एन्करबर्ग शो में डॉक्टर रवी जकर्याह दोष निकालनेवालों को जवाब देते हैं/

रवी भारत में पले-बढ़े, जहाँ इनके पूर्वज याजकों में ऊँची जाती के थे, लेकिन एक दिन इन्होने यीशु मसीह के वचनों को सुना और विश्वासी बन गए, और अब ये संसार में सबसे बुद्धिमान मसीही अपोलोजिस्ट हैं, 70 से भी ज्यादा देशों में यात्रा की हैं, और बहुत सम्मानित यूनिवर्सिटीज में वक्ता रहे हैं,जिन में हैं, हारवर्ड, प्रिंस्टन, डार्टमाउथ, जॉनस होपकिन्स और ओक्स्वार्ड यूनिवर्सिटी में भी/ ये दक्षिण अफ्रीका में पीस अकॉर्ड को भी संदेश देते हैं, और मिलटरी अफसरों को भी लेनन मिलटरी अकैडमी में, सेंटर फॉर जिओपोलिटिकल स्ट्रेटजी मास्को में/

तीन बार इन्हें न्युयोर्क में युनायटेड नेशन के एन्युअल प्रेअर ब्रेकफास्ट मीटिंग में बुलाया गया/ और इन्होने नेशनल प्रेअर ब्रेकफास्ट में सिट ऑफ गवरमेंट ओटावा, केनडा में भी संदेश दिया है, और लन्दन इंग्लैंड में, और सी आय ए वाशिंगटन डी सी में भी वक्ता रहे हैं, आज हमारे साथ जुड़ जाए विशेष प्रोग्राम द जॉन एन्करबर्ग शो में/

 

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डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  प्रोग्राम में स्वागत है, मैं हूँ जॉन एन्करबर्ग, आज हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद, और मेरे मेहमान हैं जो आपने सुना है, बुद्धिमान फिलोसोफर, थियोलोजियन, मसीही अपोलोजिस्ट डॉक्टर रवी जकर्यास और इन्होने बहुत से विद्यार्थियों से बातें की हैं, यूनिवर्सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों से पूरे संसार में, ७० देशों में, मेरे परिचित  लोगों में सबसे ज्यादा, और आज हम पूछेगे, कुछ सबसे मुश्किल सवालों को, जो यूरोप के विद्यार्थियों से इनके सामने रखे हैं, ठीक है, आप सबलोग जो यूरोप के देशों से देख रहे हैं, रवी तो आए थे कैम्ब्रिज में, यहाँ क्लासेस को सुना, ये आपको पहले  भी लेक्चर दे चुके हैं और मिले हैं, और रवी मैं चाहता हूँ आज पहला सवाल यही पूछूं/ हजारों लोग कहते हैं, हरकोई पोस्टमॉडर्निज्म की बारे में चर्चा करता है, इस शब्द का सच में क्या अर्थ है/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  जानते हैं, खासकर पश्चिम में, यदि आप देखे, सारी विचारधारा की माता, याने ये तो यूरोप के महाद्वीप से आता है, चाहे आप रैश्न्लिज्म में जाए, रेने डेकार्ट के समय से, और ये सब, रैश्न्लिज्म सफल हुआ था और ज्योति आई थी, फिर इम्पीरिसीजम आया,  इम्पीरिजम  से हम एक्जीटेइज्म में आते हैं, और  एक्जीटेइज्म   के बाद में आता है पोस्ट मॉडर्निज्म आता है/ ये अद्भुत है क्योंकि यदि आप रैश्न्लिज्म में जाए याने केवल कारण से, यदि आप  इम्पीरिसीजम में जाए, जानते हैं, ये तो इम्पीरिकल तरीका है, और लॉजिकल पॉजिटिवइज़म ये सब अस्तित्व में आया/

लेकीन फिर  एक्जीटेइज्म आया, लगभग 60 और लोग जैसे जॉन पोल, सार्ट और अल्बर्ट कमू, वो बुद्धिमान लेखक थे और सामन्य रूप में वो यही कर हर थे कि वो यही कह रहे थे, रुकीए एक मिनट ये सब ये अ\सब अजीब सी बातें, ये सब लबोरोटरी बातें हैं, लेकिन मैं ऐसा व्यक्ति हूँ जो इच्छा और मह्सुसिकरण के साथ का हूँ, ये सब आपकी थेयरीमें कहाँ फिट होता है, मैं करूंगा, मुझे लगता है, मुझे चाहिए, तो  एक्जीटेलीइज्म तो सच में, इच्छा थी कि खुद का चुनाव करे, ये तो परेशानी का सामना करना है और अपने जीवन के लिए अर्थ ढूंडना है/

और उन्होंने इसे कैसे किया उसके बारे में बहुत ही सटीक थे, वो थीयरी के एकडमीक साल से हट गए, लिटरेचर के संसार में, और कहानी बताने में, याने सार्ट और कमू, किताबे उंडेल रहे थे, नो एक्सिट, नोज़िया, और जैसे वो द वोल थे, ये विख्यात किताबे थी, ये तो छोटी किताबे थे, लेकिन वो हमें कहानी बता रहे थी, और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थिथी इसे ले रहे थे, वो खुद को इस कहानी में जानते थे/

याने हम रैश्न्लिज्म से निकल कर पॉजिटिवइज़म  से  एक्जीटेइज्म में आते हैं/ और अंत में आता है पोस्ट मॉडर्निजम,  पोस्ट मॉडर्निजम इन सबको फेंकना चाहता है, उन्होंने कहा देखिए ये बहुत सटीकता का है, आप मुझे सीमाए दे रहे हैं, याने  पोस्ट मॉडर्निजम की परिभाषा करे तो तीन तरह से कर सकते हैं, सत्य नही है, अर्थ नही है, निश्चितता नही है/ सत्य नही, अर्थ नही, निश्चितता नही/ जैक डेरीडग, एक फ्रेन्च व्यक्ति इस विचारधारा के चलन में मुख्य व्यक्ति थे, वो पूरे युनायटेड स्टेट्स में भाषण दे रहे थे, और इससे आया पोस्ट स्ट्रूकचरलिजम, अब तो वो कहानी भी दूर की गई है, चर्चा तो भूल जाइए, कहानी भी दूर की गई है/

और इसने अर्थ बताने के अधिकार को दूर किया, लेखक से पढनेवाले तक,पढनेवाले फिर से लिख सकते थे, पढनेवाले अलग अर्थ लगा सकते थे, पढनेवाले फिर बता सकते थे, और फिर अचानक लाखों लोग इस असलियत को फिर से अर्थ देते हैं/

अब मैं यही कहना चाहता हूँ, कि इन सब में सत्य का कुछ अंश है, जानते हैं, कारण के लिए जगह है, एम्पिरिसिस्म के लिए जगह है, अनुभव और इच्छा के लिए जगह है, अब सवाल उठता है, सुनो, जब मैं ये सब देखता हूँ तो मेरे पास क्या अधिकार है/ एक ऊँगली पकड़ने के द्वारा, उन्होंने सोचा कि वो पूरी असलियत का हाथ थम रहे हैं/

मेरे लिए सुसमाचार में अद्भुत बात तो ये है कि कारण के लिए जगह है, अनुभव के लिए जगह है, पूरी तरह जाँच करने के लिए जगह है,व्यक्तिगत रूप में जगह है कि कैसे परमेश्वर हमें अपनी आज़ादी देता है, और ये जिस तरह से आपको जोड़ता है फिर भी आपकी अद्भुतता आपको देता है, ज्यादा आधुनिक होने से बहुत ज्यादा नुकसान होता है/ अधिकार और सत्य के ढ़ांचे के रूप में नुकसान करता है/ सत्य नही, अर्थ नही, निश्चितता नही, और पोस्ट मॉडर्निजम तो संसार पर राज्य करनेवाला दृष्टिकोण बन गया/

तो मेरे पास ये सवाल है, यदि आप प्लेन में हैं, और प्लेन मुश्किल में है/ तो क्या आप पोस्ट मॉडर्निस्ट पायलट चाहेगे/ जो कहे मुझे पता है कि ये इन्सट्रूमेंट कहता है, 10000, लेकिन मैं विश्वास करता हूँ कि सत्य, अर्थ और निश्चितता नाम की कोई चीज़ नही है, तो मैं खुद अपना अलटीट्युड निश्चित करूंगा/ हम ऐसे नही करते हैं, जब हम सत्य पर आधारित रहने बाजू में रहते हैं, सत्य नाम की एक चीज़ है, नाम की चीज़ है, और निश्चितता नाम की चीज़ होती है/ हम जिस तरह से अपने चुनाव करते हैं उसमे भी/

तो पोस्ट-मॉडर्निजम कुछ नही लेकिन बचाव का मार्ग रास्ता है कि खुद को ईश्वर बना दे/ शुरू से ही पोस्ट-मॉडर्निस्ट थे, उत्पत्ति में, क्या परमेश्वर ने सच में कहा है, क्या परमेश्वर ने कहा है, सत्य नही, अर्थ नही, निश्चितता नही/ उत्पत्ति की किताब में पोस्ट-मॉडर्निजम है, ये तो कोई नई बात नही है, ये तो सच में गिरे हुए मनुष्य की दशा है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  जी, मैं सोचता हूँ कि पोस्ट मॉडर्निज्म, जैसे मानो शहर के सारे सिगनल हरे हो गए, और यदि ऐसे हो तो गडबडी होगी, और एक्सीडेंट भी/ और बस यही होगा, अब चलिए इसके साथ एक और सवाल देखे, इसी विषय में, एक और विद्यार्थी ने पूछा था, ये कैसे निश्चित रूप में होता है कि यदि नैतिक व्यवस्था दी गई है तो उसे देनेवाला भी होगा?

डॉक्टर रवि जकर्याह:  ये महान सवाल है, और सच में मैंने इस पर बहुत समय तक सोचा, जॉन, जानते हैं, कि किस तरह से इस लिंक के बारे में सोचे, नैतिक व्यवस्था और नैतिक व्यवस्था देनेवाले के बारे में, और ये सब इस समस्या के साथ आया क्योंकि बुराई बढ़ गई है, जब हम बुराई की समस्या को बढाते हैं, तो अनुमान लगाते है कि भलाई है, तो सोचते हैं कि नैतिक व्यवस्था है, नैतिक व्यवस्था का अनुमान लगाते है तो सोचते हैं कि नैतिक व्यवस्था देनेवाला होगा/ सवाल है क्यों?

और उसके लिए यही जवाब है, क्योंकि कोई भी जो बुराई की समस्या के बारे में सवाल उठाते हैं, ये एक तो उस व्यक्ति के द्वारा उठाया जाता है, या किसी व्यक्ति के बारे में है, इसका अर्थ है कि बुराई की समस्या, जब ये सकारात्मक होता है, ये तो उस व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में अनुमान लगाता है, यदि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के लिए कोई अर्थ नही है, तो सवाल तो खुद को नाश करनेवाला होता है, याने ये सवाल सही होने के लिए व्यक्तित्व होना जरूरी है/ इसलिए हम इसे सही तब कह सकते हैं, जब व्यक्ति किसी एक महान सृष्टिकर्ता के द्वारा बनाया गया है, जो स्वयं परमेश्वर है/ इसलिए हम नैतिक व्यवस्था देनेवाले को देखते हैं, यदि व्यक्तित्व मूल्यवान नही तो है ये सवाल नाश करनेवाला हो सकता है/

ये बहुत उलझी हुई बात है, लेकिन ये बहुत महत्वपूर्ण है/ और जब भी मैंने दोष निकालनेवालों से बातें की, तो वो रुककर कहते हैं, खैर जानते हैं, जी हाँ और फिर वो मुड़कर दूसरी दिशा में जाना चाहते हैं, आपका जीवन और मेरा जीवन अद्भुत मूल्य रखता है, बुराई की समस्या का सवाल तो सही है, और ये अद्भुत मूल्य तो केवल तब आता है जब हम स्वयं परमेश्वर की सृष्टि हैं/  और समय और तत्व और मौके को मिलाने से नही/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  रवी, एक और विद्यार्थी ने रिचर्ड डोकीन्स के बारे में पूछा, पूरे संसार में लोग इस विख्यात नास्तिक को जानते हैं, और डोकीन्स कहते हैं कि उनके फिलोसोफिकल फ्रेमवर्क में चार दरार हैं जिन्हें भरना हैं, वो क्या हैं उन्होंने कहा कि कैसे जीवन बिना जीवन के आया, नैतिकता की दरार, विवेक की दरार, और शारीरिकता की दरार/ विद्यार्थी चाहते हैं कि जवाब दे

डॉक्टर रवि जकर्याह:  जी, और मैं हमेशा कहता हूँ कि वो ये बहुत बड़ी दरार हैं, इसे निगलना बहुत मुश्किल होता है/ मतलब यदि हम में वो दरार हैं, आस्था के इस ढ़ांचे में, तो इस पर सब लोग हंसते थे/

खैर डोकीन्स के बारे में दिलचस्प कहानी है, कुछ सम पहले वो बी बी सी पर थे, जाइल्स फ्रेजर के साथ, जो सेंट पॉलस कैथीड्रल के डीन रह चुके हैं/ और डोकीन्स मसीही लोगों का मजाक उड़ा रहे थे, जो करना उन्हें पसंद हैं, और उन्होंने ये वाक्य कहा कि बहुत से विश्वासी सुसमाचार का नाम भी नही ले पाते हैं, और जाइल्स फ्रेजर ने उनकी ओर देखकर कहा रिचर्ड/ आपकी बाइबल तो प्राणियों की शुरूवात की है, है ना? और डोकीन्स ने कहा जी हाँ ये है, शायद आप इस तरह से कह सकते हैं, उन्होंने कहा ठीक है, क्या आप मुझे किताब के पूरे टायटल बता सकते हैं? और डोकीन्स ने काफी समय तक रुककर कहा, जी मैं जानता हूँ कि ये बड़ा शीर्षक है/ तो जाइल्स फ्रेजर ने कहा तो बताइए रिचर्ड/ क्या आप मुझे पूरा शीर्षक बताएगे? और उन्होंने शुरू किया, मैं इसे ऐसे ही कोट करूंगा, इस तरह कोट करने के लिए मुझे माफ कीजिए, उन्होंने इस तरह से कहा, प्राणियों की शुरुवात, हाँ, प्राणियों की शुरुवात, ओ मेरे प्रभु, मैं अपने पूरे जीवन भर इस शीर्षक को याद नही रख सकता/ उन्होंने कहा/  

और जानते हैं ये बड़ा शीर्षक है/ मुझे याद है उस समय कह रहे थे, जानते हैं, परमेश्वर के महान होने के बारे में सबसे बड़ा सबूत तो ये है/ कि यहाँ तक कि नास्तिक को परमेश्वर को पुकारना पड़ा/ कि उसे किताब का शीर्षक याद दिलाए, जो सबसे पहले परमेश्वर पर विश्वास नही करते हैं/  और अगले दिन अख़बारों में हेडलाईन थी कि नास्तिक लोगों के लिए बुरा दिन था/ क्योंकि वो पूरे शीर्षक को भी नही बता पाए/

लेकिन जानते हैं, वो मजाक उड़ानेवाले हैं, सच में वाशिंगटन में किसी ने उनसे पूछा कि जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उनके साथ कैसे व्यवहार करेगे? तो कहा उनका मजाक उड़ाइए/ अविश्वासी लोगो वो केवल परमेश्वर में हमारे विश्वास का मजाक नही उड़ा रहे हैं, मसीही लोगों का, वो परमेश्वर में सब विश्वास का मजाक उड़ा रहे हैं, इस पर गौर कीजिए/ वो आस्था के खिलाफ हैं, परमेश्वर के खिलाफ हैं/ वो कायर हैं, और वो सीधा बाहर आकर नही  कहते हैं, कि उनका सच में क्या उपयोग हैं/

अब दरार के बारे में सोचिए/ उदाहरण के लिए जीवन की शुरुवात, कैसे जीवन बिना जीवन से आ सकता है? कैसे बिना विवेक से विवेक आ सकता है? कैसे अनैतिक या बिना नैतिकता की शुरुवात नैतिक कारण को बना सकती है/ और शारीरिकता क्या है? लेकिन सच में यही हो रहा है/ ये दरार बड़ी हैं, दरार का परमेश्वर हटाया गया, कि विश्वासियों के लिए काम करे या अविश्वासीयों के लिए काम करे, हम इसे कैसे भर सकते हैं, ये दरार केवल सर्वसामर्थी परमेश्वर द्वारा ही भर सकती है/  

इसलिए विख्यात वैज्ञानिक जैसे फैरीडे और न्यूटन और ये सब सच्चे विश्वासी थे, उन्होंने विश्वास किया कि इस संसार को बताने का कोई तरीका नही है/ आस्था के और प्रभु के काम के बाहर नही बता सकते हैं, खुद सुलेमान ने कहा,अपनी जवानी के दिनों में अपना विश्वास उसकी ओर फेर दे/ नही तो सबकुछ अर्थहिन हो जाएगा/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  रवी, यहाँ एक दिलचस्प सवाल है जो यूरोप के विद्यार्थी से आता है, कहिए तो हालही में दो एक विख्यात व्यक्ति और पोप के बीच बातचीत हुई, जहाँ पोप ने कहा कि विश्वास के केवल भरोसा करना नही है, लेकिन ये इस तरह जीवन का मार्ग है/ फिर विद्यार्थी ने कहा क्या जी के चेस्टरटन, जिन्होंने लिखा कि जो व्यक्ति मसीही है, और अवतार लेने और पुनरुत्थान के विश्वास का अंगीकार करता है, वो शायद पूरी तरह गैर-मसीही जैसे व्यवहार करे, जब कि कोई मनुष्य मसीह में विश्वास नही करता शायद वो पूरे मसीही जैसे व्यवहार करे/ आप इसके बारे में क्या कहेगे?

डॉक्टर रवि जकर्याह:  मैं सोचता हूँ कि ये अच्छा सवाल है/ यदि हम इसे थोडा और स्पष्ट करे, जॉन, मैं सोचता हूँ कि ये सोचने के लिए सबसे मुश्किल सवाल होगा, लेकिन जवाब तो इससे शुरू होना चाहिए, यीशु मसीह के सच्चे अनुयायी के लिए, आप इसे अपने विश्वास से बाहर नही निकाल सकते हैं, और इसके साथ अनिश्चित व्यवहार नही कर सकते हैं, यीशु इसके बारे में हमें बार बार याद दिलाता है, और वो कहता है कि तुम्हारी ज्योति मनुष्य के सामने प्रकट हो, कि वो तुम्हारे भले कामों को देखे और तुम्हारे स्वर्गीय पिता को महिमा दे/

कुछ भी हो, कुछ करने से आप यीशु मसीह के चेले नही बनते हैं, यदि आप अपने दिल से विश्वास करे और मुंह से अंगीकार करे कि यीशु मसीह प्रभु है, तब हम उद्धार पाते हैं, लेकिन उसके बाद हमारी क्रिया उसके अनुसार होनी चाहिए/ जो व्यक्ति सोचता है कि अच्छा करने से, सही काम करने से, वो स्वर्ग का मार्ग पाते हैं, ये तो सच में यीशु ने इसके बारे में जो सिखाया उसे अनदेखा करना है/

याकूब की पूरी किताब इस बात पर गौर करती है कि कैसे कर्म बिना विश्वास मरा हुआ है/ वो सच में यही कह रहा है कि यदि आप कहते  हैं कि आप में अविश्वास है, लेकिन यदि आप इस तरह से नही जीते हैं, आप में सच में वो विश्वास नही है, तो ये केवल उत्सव मनाने की बात है/ मसीही के लिए विश्वास और क्रिया जुडनी चाहिए/ पौलुस तीमुथियुस से कहता है कि अपने सिद्धान्त और अपने जीवन की रक्षा कर/ उन दोनों को सुरक्षित रखना चाहिए/ और हम कभी किसी सिद्धान्त के गलत उपयोग से उसका न्याय नही कर सकते हैं/

तो मैं सोचता हूँ कि बात तो यही है, जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है उसे कोई मनुष्य नीचे न रखे/ यदि मैं अपनी पत्नी से वादा करता हूँ कि मैं उससे प्रेम करता हूँ, और उसे बहुत से सुंदर कार्ड्स देता हूँ, और सबकुछ करता हूँ, लेकिन इसे कभी प्रकट नही करता, तो वो मुझ से गंभीर सवाल पूछेगी कि प्रेम से मेरा मतलब क्या है/ क्योंकि शब्द और व्यवहार दोनों एक दूसरे से मिलने चाहिए/ शब्द तो वास्तविकता को दिखानेवाले हैं, और वो अंत में सिर से दिल तक पहुंचाते हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  हम दूसरी आस्था और मसीहियत में देखेगे, ये दिलचस्प है, कि पोप और विख्यात व्यक्ति विचारों की लेन-देन कर रहे थे, क्योंकि संसार के दो दृष्टिकोण है जो सामने आते हैं, और मैं आस्था के बारे में इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये बहुत ही विख्यात सवाल आता है, हमारी वेबसाइट पर, केवल यहाँ नही यूरोप में भी, याने लोग किसी तरह उसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं, कुछ मूवी स्टार हॉलीवुड में, वो इस आस्था में आएं हैं, तो मैं कह रहा हूँ कि इस समय संसार के दृष्टिकोण की तूलना करते हैं/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  आपने बिलकुल सही कहा है, जैसे मैं यात्रा करता हूँ, चाहे व्यक्तिगत रूप में जाऊं, या मुझे जो मेल आते हैं, वो दिलचस्पी लेते हैं, कहते हैं, इस आस्था में क्या है, उस आस्था में क्या है, लोग सच में भूल जाते हैं कि इन में सबसे भयानक भरमाया जाना हो सकता है/ ये हमें ये विश्वास करने लगाता कि हम परमेश्वर के बिना अच्छे हो सकते हैं, क्योंकि कुछ आस्था में कोई परमेश्वर नही होता है/ कुछ आस्था में परमेश्वर के बारे में कोई शिक्षा नही है/

और एक बार मैं थायलैंड के एक विख्यात महिला के साथ जब मैं चर्चा कर रहा था, वो तो उस क्षेत्र की बहुत ही विख्यात महिला थी, पी एच डी मैकमास्टर यूनिवर्सिटी से, कैनडा से और फिर वो थायलैंड में वापस आई, श्रीलंका में आस्था के लिए गई, और मैंने उनसे बात करने के सौभाग्य के लिए संपर्क किया, हम अद्भुत तरह से चर्चा कर रहे थे, तो एक जगह मैंने उनसे कहा, आपको क्या लगाता है कि आपके विश्वास के लिए सबसे प्रभावी मनुष्य कौन रहा है, उन्होंने कहा एक महान व्यक्ति, मैंने कहा आपका लक्ष्य यही है कि उनकी इच्छा पूरी करें, उससे बढकर कुछ नही चाहते हैं, उन्होंने कहा कि ये सही है/ मैंने कहा कि क्या आप बता सकते हैं कि क्यों वो विख्यात व्यक्ति, अपने देश की आज़ादी के बारे में इच्छा रखते हैं, जब कि आपके विश्वास का सबसे बड़ा पर्याय आप जहाँ जा रहे हैं, उसी का उलंघन करता है, आप इसे कैसे जवाब देगे/ वो शान्त हो गई, और फिर कहा वो ये करना चाहते हैं, हम बता सकते थे कि वो इस समय गुस्से में आ रही थी/ तो मैं पीछे हट गया/

मैंने कहा मैं आप से एक और सवाल पूछना चाहता हूँ, मैडम, मैंने कहा वो ये है, आप विश्वास करती हैं कि हर जन्म पुनर्जन्म है/ उन्होंने कहा जी हाँ, मैंने कहा यदि आप अब से शुरू कर पीछे जाते हैं, ठीक है, आप अब से शुरू कर पीछे जाइए, आपके अगणित जन्म हुए हैं, क्या ये सही है? उन्होंने कहा मैं यही कहूंगी/ मैंने कहा जब कि आप विश्वास करती हैं कि हर जन्म पुनर्जन्म है, और हर जन्म पिछले जन्म का दाम चुकाना है, और आपके अगणित जन्म हो चुके हैं, इसका ये अर्थ होगा कि आपका पहला जन्म हुआ था, क्या ये सही है, तो रुककर कहने लगी कि हाँ मैं यही कहूंगी, तो आप अपने पहले जन्म में किसका दाम चूका रही थी? इस सवाल से दिखता था कि वो पूरी तरह हिल गई थी/ उसने कहा कि हम चूनते हैं कि इस तरह के सवाल न पूछे/

सच तो ये था कि वो अपना परिवार छोडकर आई थी, जैसे बड़े लोग करते हैं, उन्होंने अपने बच्चों को छोड़ दिया था,अपने पति को भी, और उनका इनकार किया, मैंने पूछा क्या आप बच्चे से मिलना चाहती हैं? मैं देख सकता था कि आंसू बह रहे हैं, और होठ कांपने लगे थे, उन्होंने कहा, मैं प्रतिदिन उन्हें घर से लेकर स्कुल में पहुँचाती हूँ,  और स्कुल से घर ले जाती हूँ, उनके पास कार थी, वो भक्त स्त्री थी, वो भली स्त्री थी तो पुरुष को कार नही चलाने देती, तो खुद अकेले ही बच्चों को स्कुल ले जाती थी, वो वहां इस बात तो स्पष्ट देख सकती थी/

एक बार मेरे एक अविश्वासी दोस्त ने मुझ से कहा, वो मसीह को जानने लगे, उन्होंने कहा जानते हो रवी, एक दिन सुबह के समय उठा और हमारी चर्चा पर सोच रहा था, फिर मैंने सोचा कि मेरे बैंक मैनेजर मुझे बताते हैं कि मुझे कितना चुकाना है/ और मुझे बैंक को कितना चुकाना है, उन्होंने कहा कि मेरे कर्मों के चक्र में मुझे पता नही कि कितना चुकाना है/ कितने समय तक मुझे चुकाना होगा, उन्होंने कहा ये बेदर्द तरीका है, और फिर उन्होंने अपना जीवन मसीह को दिया/

याने जो लोग इस तरह के विचारों से जीते हैं, मैं आप से कहता हूँ कि आप अच्छा जीवन जीना चाहते हैं, ये मुझे बहुत कुछ बताता है कि आप कौन हैं, आप चोट नही पहुंचाना चाहते हैं, दर्द नही देना चाहते हैं, लेकिन मैं आपको याद दिलाऊं/ भलाई आपके भीतर से नही आती है, संसार में सबसे बड़ी समस्या आपके बाहर नही है, ये आपके अंदर है/ और बदला हुआ मनुष्य का दिल और यीशु मसीह का अनुग्रह, और आपके साथ उसकी उपस्थिति, आपको सही तरह की भूख देती है/ कि आप ये जाने कि आपे लिए ये निश्चित है कि एक बार आप मरे, और उसके बाद आप अपने सृष्टिकर्ता से मिले/

यदि आप इस संसार के उन देशों को देखे, जिनके पास आस्था के लिए सही नियम रखते हैं, आप पाएगे कि आज वो बहुत नियम तोड़ते जा रहे हैं, क्योंकि केवल नियम में कोई सामर्थ नही होती है/ ये केवल खिचता है कि आपको इसी तरह से जाना चाहिए/ परमेश्वर आपको बल देता है और मसीही विश्वास आपको सही काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  मैं भूमिका बदलूँगा, आपको युनायटेड नेशन्स के लीडर को संदेश देने के लिए कहा गया था, इनके प्रेअर ब्रेकफास्ट में इनके शुरू के सेशन में, यहाँ युनायटेड नेशन में, हमें बताइए कि आपने उन्हें क्या बताया, और अंत में आपने उन्हें एक दृष्टान्त दिया, मैं चाहता हूँ कि आप हमारे दर्शकों को ये बताए/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  प्रभु के अनुग्रह से हालही में उन्होंने मुझे तीसरी बार आने के लिए कहा, जॉन और मैंने जाकर संदेश दिया, ये सम्मान की बात है/ ये रोमांचित करनेवाला है, केवल 15 से 18 मिनट होते हैं, और सब आस्था के लिए लोगों के लिए सचेत रहना पड़ता है/

मैंने उन्हें सटीकता की खोज के बारे में बताया, और फिर अंत में, वो तो सुन रहे थे, मैं आपको बताऊ यदि वो अंत में एक साथ आ जाए, राजदूत ऐसी बातें बताते हैं जो बहुत ही व्यक्तिगत होते हैं, और उन में से एक ने, खैर उनका नाम नही बताऊंगा,उन्होंने कहा कि मैं उनके ऑफिस में आकर सारे स्टाफ के साथ प्रार्थना करूं, और एक नास्तिक देश से थे, उन्होंने मुझ से कहा, मैं हमेशा सोचता था कि मैं यहाँ क्यों आया हूँ, अब बताता हूँ कि अपना वाक्य किस तरह से खत्म किया/

मैंने अंत में ये बताया, दृष्टान्त, एक धनी व्यक्ति के बेटे का दृष्टान्त, उसका बेटा कोमल दिल का व्यक्ति था, वो शहर में जाता और एक भिखारी से बातें करता था, अक्सर सडक पर बात करता था, और भिखारी भी उसे पसंद करता था, वो उसे कुछ पैसे देता था, और फिर एक दिन, एक दिन उसने आना बंद कर दिया, तो भिखारी उसके पास गया और बाहर वॉचमैन को देखा, मैं अब उस जवान को नही देख रहा हूँ, उसने कहा, अचानक उसकी मृत्यु हो गई है, उसने कहा वो बेटा मुझ से अपने पिता की आर्ट गैलरी के बारे में कहता था, उसके पिताजी पेंटिंग पसंद करते थे, मैं कुछ करना चाहता हूँ, तो उसने जाकर इस बेटे का एक पोईटरेट बनाया और वॉचमैन को दिया और कहा कि इसे पिताजी को दीजिए, मैं उनके बेटे से प्यार करता था, वो भले व्यक्ति थे/

कुछ साल बीतते हैं और पता चलता है कि पिताजी भीं नही रहे, और पूरी आर्ट गैलरी की निलामी होनेवाली थी/ तो वो सोचने लगा कि क्या वो भीतर जा सकेगा, उसने कुछ अच्छे कपड़े लिए, किसी तरह वो भीतर आ गया, और वो देखना चाहता था कि क्या उसका पोईटरेट उस गैलरी में है या नही, और अवश्य ही वो वहां सेन्टर पीस था, और जैसे वो देख रहा था रोमांचित हो गया, कि पिता भी अपने बेटे से प्यार करते थे, और नीलामी शुरू हुई, लेकिन नीलामिवाले पहले उस पोईटरेट के पास गए और कहा कि पिताजी की इच्छा थी कि पहले इसकी नीलामी हो, और सब उसे नही चाहते थे, लेकिन जब किसी ने उस पर बोली नही लगाई तो भिखारी ने कहा, मेरे पास जो कुछ है उसे देकर इसे लूँगा, और उसने उसे ले लिया/

फिर नीलामीवाले ने कहा अब हम बाकी कि ओर चलते हैं, और उन्होंने नीलामीवाले ने हथोडा मारा और दूसरे लोगों ने कहा हम दूसरी पेंटिंग खरीदना चाहते हैं, नीलामीवाले ने कहा, नही, नही, जो धनी व्यक्ति मर गया उसने मृत्युपत्र में लिखा था जो भी उनके बेटे का पोईटरेट लेगा, वो पूरी आर्ट गैलरी का मालिक होगा/

पुर्वीय लोग दृष्टान्त पसंद करते हैं, कहानी पसंद करते हैं, यू एन के राजदूतों से दिखनेवाला प्रतिउत्तर दिखाई दिया, और मैंने कहा भाइयों और बहनों, जब आप बेटे को लेगे, तो आपको यीशु मसीह में पूरी वास्तविकता मिल जाएगी, और इस तरह से मैनें सुसमाचार बताया/

वो सब लाइन में खड़े हुए जॉन, और जैसे मैंने कहा एक राजूदत ने आकर कहा, नास्तिक देश से, उन्होंने कहा मिस्टर जकर्याह, मुझे पता नही मैं यहाँ क्यों आया, मैं हमेशा सोचता था क्यों, आज मुझे जवाब मिल गया,मैं यहाँ पर आया इसलिए कि परमेश्वर को पा सकूं, कितनी अद्भत कहानी है कि इस कहानी का अंत करें, और आप जो सुन रहे हैं, जब आप यीशु मसीह को लेगे, जब आप बेटे को लेगे, तो आप अपने स्वर्गीय पिता की पूरी विरासत पाएगे/ आप उस पर भरोसा रख सकते हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  जो लोग अभी यीशु मसीह के बारे में सुन रहे हैं, और ये उन के लिए किसी तरह की समझ रखता है, ठीक है, शायद ये उनके लिए स्टीरियोटाइप है, या शायद वो इसे पहली बार सुन  रहे हैं, ये सुसमाचार क्या है अच्छी खबर क्या है जो यीशु मसीह ने लाई थी, कैसे लोग यीशु मसीह के साथ संबंध में आते हैं, और खुद के लिए सामर्थ का अनुभव करते हैं?

डॉक्टर रवि जकर्याह:  यही मुड़ने की जगह है,मनुष्य जाती से अपनी दृष्टी फेर ले, उन लोगों से आँखें फेर ले जो ढोंगी हैं और उनके कारण संदेह करते हैं, गलत शिक्षा में जाते, यीशु ने कहा जो कोई मेरे पास आएगा,मैं उसे किसी तरह नही निकालूँगा, प्रेरित पौलुस कहता है कि हम मसीह और कृसार्पित यीशु का प्रचार करते हैं, तो मैं आप से कहता हूँ, आप जहाँ भी हैं, अपना सिर झुककर उसे अपने जीवन में न्योता दे, यदि आपका बेटा है और वो कहे डैडी क्या मैं आपकी गोदी में बैठ सकता हूँ, मैं आपके पास आकर आपको गले लगाना चाहता हूँ, आप आने बेटे के लिए इसे करेगे, तो आपका स्वर्गीय पिता ज्यादा क्यों न करेगा? कहे मैं तुझे स्वीकार करता हूँ, तुझ पर भरोसा करता हूँ/ मेरा उद्धारक हो जा/ यही प्रार्थना है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  प्रार्थना में अगुवाई कीजिए, जो ये प्रार्थना कर यीशु को अपने जीवन में न्योता देना चाहते हैं, उन्हें ये ढांचा दीजिए कि इसका उपयोग कर सके/

डॉक्टर रवि जकर्याह:  मैं इससे करने में बहुत खुश हो जाऊँगा, और आप लोग जो सुन रहे हैं, चाहे आप जहाँ भी हो, बस यहाँ वहां न देखिए, अपना सिर झुकाए और ये प्रार्थना दोहराइए, एक समय एक लाइन में, जैसे मैं आपके लिए प्रार्थना करता हूँ, ये सरल हैं, लेकिन बहुत ही उपयोगी हैं, प्रिय प्रभु यीशु, तूने खुद को संसार के उद्धारक के रूप में दे दिया, और तूने खुद को मेरे लिए दे दिया, मैं तुझे स्वीकार करता हूँ, मैं तुझ पर भरोसा रखता हूँ, मैं अपने आप को तुझे सौंप देता हूँ, मैं तेरे पीछे चलना चाहता हूँ, तेरे वचन पढने में मेरी मदत कर/ और तेरे पास रहूँ, प्रभु यीशु मैं तुझे मेरे उद्धारक के रूप में न्योता देता हूँ, और बाकि सारी आस्था से दूर होता हूँ, जो बिच में आती है, मेरे साथ तेरे संबंध में, तेरे पवित्र नाम  में मैं प्रार्थना करता हूँ, आमीन/  

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  दोस्तों, आशा करता हूँ कि आपने ये प्रार्थना की है, इसी समय, और यदि आप इस विषय में अभी भी सवाल पूछ रहे हैं कि कैसे प्रभु यीशु को अपने जीवन में न्योता दे, तो हमारी वेबसाइट पर एक जगह है, जहाँ आप जानकारी पढ़ सकते हैं, और प्रार्थना कर सकते हैं, मैं चाहता हूँ कि इसके बारे में ध्यान से सोचिए, ये सबसे  महत्वपूर्ण सवाल है, आपके जीवन का, अगले हफ्ते हम आगे देखेगे डॉक्टर रवी जकर्यास के साथ, जब हम चर्चा करते हैं, मुश्किल सवालों के बारे में, यहाँ युनायटेड स्टेट्स के विद्यार्थियों ने पूछे हैं, ये वक्ता रहे हैं, होवर्ड, प्रिन्सटन और डार्टमिथ और हमारे देश के बड़े यूनिवर्सिटी में, उन्होंने सबसे मुश्किल सवाल कौनसा पूछा होगा? आशा करता हूँ कि अगले हफ्ते हमारे साथ जुड़ जाएगे/

 

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