रवी ज़करिया दोष निकालनेवालों को जवाब देते हैं – प्रोग्राम 2

रवी ज़करिया दोष निकालनेवालों को जवाब देते हैंप्रोग्राम 2

आज द जॉन एन्करबर्ग शो में डॉक्टर रवी जकर्याह दोष निकालनेवालों को जवाब देते हैं/

रवी भारत में पले-बढ़े, जहाँ इनके पूर्वज याजकों में ऊँची जाती के थे, लेकिन एक दिन इन्होने यीशु मसीह के वचनों को सुना और विश्वासी बन गए, और अब ये संसार में सबसे बुद्धिमान मसीही अपोलोजिस्ट हैं, 70 से भी ज्यादा देशों में यात्रा की हैं, और बहुत सम्मानित यूनिवर्सिटीज में वक्ता रहे हैं,जिन में हैं, हारवर्ड, प्रिंस्टन, डार्टमाउथ, जॉनस होपकिन्स और ओक्स्वार्ड यूनिवर्सिटी में भी/ ये दक्षिण अफ्रीका में पीस अकॉर्ड को भी संदेश देते हैं, और मिलटरी अफसरों को भी लेनन मिलटरी अकैडमी में, सेंटर फॉर जिओपोलिटिकल स्ट्रेटजी मास्को में/

तीन बार इन्हें न्युयोर्क में युनायटेड नेशन के एन्युअल प्रेअर ब्रेकफास्ट मीटिंग में बुलाया गया/ और इन्होने नेशनल प्रेअर ब्रेकफास्ट में सिट ऑफ गवरमेंट ओटावा, केनडा में भी संदेश दिया है, और लन्दन इंग्लैंड में, और सी आय ए वाशिंगटन डी सी में भी वक्ता रहे हैं, आज हमारे साथ जुड़ जाए विशेष प्रोग्राम द जॉन एन्करबर्ग शो में/

 

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डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  प्रोग्राम में स्वागत है, मैं हूँ जॉन एन्करबर्ग, मैं खुश कि आज आप हमारे साथ जुड़ गए, और मेरे मेहमान हैं, बुद्धिमान मसीही फिलोसोफर, अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह, मेरे परिचित लोगों में से सबसे ज्यादा रवी ने बहुत से देशों में विद्यार्थियों को सिखाया है/ इन्हें सरकारी लीडर ने भी पूछा कि संसार के दुसरे भागों में आकर उनके सवालों का जवाब दे, इन्होने युनायटेड नेशन में तीन बार संदेश दिया है/ शुरू के प्रेअर ब्रेकफास्ट में, जो युनायटेड नेशन के सेशन में/

और रवी आज मैं आपसे सबसे मुश्किल सवाल पूछूँगा, जो भूतकाल में विद्यार्थियों ने आप से पूछा होगा/ संसार के दुसरे भागों से/ और इस हफ्ते हम गौर कर रहे हैं, मुश्किल सवाल जो विद्यार्थी आप से पूछना चाहते हैं पुर्वीय देशों से/ पुर्वीय देशों के लोग अलग तरह से सोचते हैं, पश्चिमी देशों से, आप पुर्वीय देशों में बढ़े हैं, तो आप इसे जानते हैं, इसलिए मैं आप से ये सवाल पूछ रहा हूँ, और हमारा पहला सवाल है, वो ये है/ विद्यार्थी ने पूछा क्या आप कृपया कर बताएगे कि यीशु किस तरह प्रतिउत्तर देगा, बहाय विश्वास को, कि सारी आस्थाएँ एक हैं, और यीशु बहुत से भविष्यवक्ताओं में से एक हैं/

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  जानते हैं, पूर्व से आने के कारण, जॉन, हम तो एक दूसरों पर सवालों की बारिश करते हैं, ये इसी तरह से है, यदि हम दिल्ली में ओपन फोरम कर हे हैं, उदाहरण के लिए या मुंबई में या चेन्नाई में, आप पाएगे, कि आप उससे बाहर नही आ सकते हैं, आपके सामने बहुत बहुत सवाल होगे, ये सवाल उठानेवाली परंपरा है/ ये मध्य-पूर्व में इतना सच है इसलिए मैं सोचता हूँ कि ये विचार इतने मुख्य हैं, उनके विचार में और धारणाओं में, कि वो जिज्ञासा से इसके पीछे चलते हैं/

तो सवसे पहले मैं सुननेवालों से ये कहना चाहता हूँ, मैं समझता हूँ कि आप इन बातों के बारे में क्या सोचते हैं, दो कारण से, नंबर एक कि ये सच्चा सवाल है/ नंबर दो कि ये परिवार से जुड़ा है, और पूर्वजों के विश्वास से, तो वो निश्चितता पर सवाल उठाते हैं, उदाहरण के लिए, या बहाय विश्वास में, जो कि सही क्रम देखता हैं, मैं जानता हूँ, जानता हूँ कि वो इसे क्यों पूछ रहे हैं/

लेकिन बहाय विश्वास लगभग 1800 में बीच में आया, उसके कुछ समय बाद, 1850 या इस समय, वो खास विश्वास से अविश्वासी लोगों ने जिस तरह से व्यवहार किया और लोगों को सताया, दुर्भाग्यवश ऐसे हुआ/ उनका मकसद अच्चा था, सबको एक साथ लाने की कोशीश कर रहे थे/ तो उदाहरण के लिए कहिए हम ऐसी जगह पर जाते हैं, मैं सोचता हूँ कि आप वहां गए होगे, वहां बड़ी बड़ी बिल्डिंग हैं/

उसमे एक व्यवहारिक समस्या है/ सारी आस्था ऐसे ही सत्य नही हो सकते, मैंने लोगों को कहते सुना कि आस्था वो बुनियादी रूप में समान हैं, केवल उपरी रूप में अलग हैं, दोष निकालनेवाले ये कहते हैं लेकिन ये उलटा है, वो व्यवहारिक रूप में अलग हैं, और केवल बाहरी रूप में समान दीखते हैं, एक विश्वास दुसरे जैसे ही नही है/ मसीहियत अविश्वास जैसे नही है/ हमने बहुत समझदारी से इन मुद्दों से हस्तक्षेप करना चाहिए/ एक दुसरे की गिनती किए बिना ही/ लेकिन सत्य को थामें रहना है/ सत्य तो अवश्य ही अटल होता है/

सारी आस्थाएँ क्यों सत्य नही हो सकती हैं? क्योंकि वास्तविकता में नॉन-कंट्राडिक्शन का नियम काम करता हैं, दो विरोधी बातें का अर्थ होता है कि दो विरोधी बातें एक साथ सही नही हो सकती है/ सटीकता तो सत्य में वास्तविकता होती है, क्योंकि सत्य तो अंगीकार की ही पहली चीज़ है/ हम इसे कोर्ट रूम में कहते हैं, जब ये हुआ तो क्या आप कमरे में थे? जवाब तो हाँ या ना होगा/ नही कहते कि एक पैर अंदर था एक बाहर था, आप शब्दों का खेल खेल सकते हैं, लेकिन पूछनेवाला सत्य देखना चाहता है/

सत्य तो अपनी परिभाषा में सटीक है, याने जब यीशु ने कहा कि मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ, मेरे बिना कोई पिता के पास नही आ सकता/ ये अद्भुत दावा था, ये महत्वपूर्ण दावा था/ ये सटीक दावा था, सवाल ये था कि ये उसके जीवन की शिक्षा के द्वारा स्थिर रहेगा, और ये सब/ हमें यही तो पूछना चाहिए, सारी आस्थाएँ एक ही नही हो सकती हैं/

अच्छे शिक्षक अविश्वासी थे, और उन्होंने अपने विश्वास में दो मुख्य बातों का इनकार किया, उन्होंने शिक्षाओं का अधिकार स्वीकार नही किया, और उन्होंने जातिवाद को स्वीकार नही किया, इसलिए इस समय भी लोग आकर कहते कि वो ए से बी में आएं हैं, हम जातिवाद पर विश्वास नही करते हैं, इन दो बातों का उन्होंने इनकार किया तब ही सत्य  के चार मार्ग आए और आठ तरह का मार्ग अस्तित्व में आया, एक आस्था दूसरी आस्था के जैसी नही है, दूसरी आस्था पहली आस्था जैसी नही है/ जी उन्होंने ऐसे सिधान्त बनाएं हैं और दावे किए हैं जो किसी विश्वास में नही हैं/ हर विश्वास में अपनी खासियत है, यहाँ तक कि बहायइज़म जो सबको जोड़ने का दावा करता है, वो सच में ढीट लोगों को बाहर रखता है/ कहते हैं कि आप ढीट होकर इस विश्वास के अनुयायी नही हो सकते हैं/ एक है समय में, देखिए, सत्य का यही स्वभाव है/

याने किसी खास दावे के बारे में परेशान होने के बजाए, कारण मुझे बताते हैं कि मैं ई न दावों का परिक्षण करूं, और देखूं कि क्या वो सत्य की परीक्षा में खड़े रहते हैं या नही/ हमें यही तो करना चाहिए/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  अब दोस्तों मैं चाहता हूँ कि आप ये जान ले, कि रवी ने इस सवाल पर बहुत कुछ बताया है, और ये सब जो इस प्रोग्राम के दौरान हम दिखा रहे हैं, आप जाइए, रवी जकर्याह में, याने गूगल कीजिए/ और इनकी वेबसाइट पर जाइए/ और जाइए यू ट्यूब में और इनके लेक्चर देख सकते हैं, और ये सवाल आप संसार के अलग भागों से सुन सकते हैं, हजरों-हजार विद्यार्थी इकट्ठा होते हैं, और ये उनका जवाब देते हैं, आप मुझ से सुनिए इस में बहुतसी जानकारी हैं/

मैं एक और काम देना चाहता हूँ, मैं सोचता हूँ कि मैं जिस किसी यूनिवर्सिटी कैम्पस में गया/ ये तो हमेशा आता है/ पूर्व के विद्यार्थी कहते हैं, उन सब आस्थाओं के बारे में क्या जो मसीहियत के पहले आए? और यदि आप कहते हैं कि मसीही संदेश सटीक है/ तो ये दावा करना पूरी तरह अन्याय नही कि ये सब लोग, नरक में जाने के दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने यीशु पर विश्वास नही किया/ आप इन से क्या कहेगे?

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  ये अच्छा सवाल है, लॉजिक में इसे कहते हैं, फैलसी ऑफ कैलेन्डर या समय, या जैसे भी कहे, यदि ये मान ले कि ये सत्य के लिए मार्गदर्शन है/ जो इसके पहले आएं,उन सारी चीजों के बारे में सोचिए जो लोगों ने पहले विश्वास  की हैं/ अब हम क्या विश्वास करते हैं? ये तो बहुत है अजीब है, क्योंकि हम कैलेन्डर के हिसाब से नही चल सकते हैं/ अविश्वासी लोगों के साथ क्या होता है? क्योंकि कुछ आस्थाएँ मसीहियत के 600 साल बाद आई, और अच्छी शिक्षाओं का दूसरी शिक्षाओं के बारे में क्या/ कुछ शिक्षाएं सदियों पहले आई हैं, बड़ी प्राचीन हैं, कुछ शिक्षा विवरण की हैं, तो उसके बाद पहली शिक्षा का क्या होता है? एक आस्था सामने आने के बाद पहली आस्था का क्या होता है? फिर इस आस्था के बाद तीसरी आस्था है/ और फिर उसके बाद चौथी आस्था है/ तो ये सब पहले ऐसे ही हुआ, ऐसे विश्वास था, तो, अजीब सी शुरूवात है/

मैं सोचता हूँ कि हमें इसे सही करना होगा, ये विचार कि यीशु मसीह 2000 साल पहले आया था, इसलिए जो कुछ भी उसके पहले था, वो दूर होना चाहिए, सच में यीशु के 3000 साल पहले, अब्राहम था/ जो विश्वास से जीता था, हम यहूदी मसीही विचारधारा से बातें करते हैं, आप यीशु के 1400 साल पहले चले जाइए/ वहां मूसा था, व्यवस्था दे रहा था, और बता रहा था कि ये कैसे छुदानेवाले के बारे में बताती है/ यहाँ तक कि उस पर भी ये कुछ अजीब और नया है ये विश्वास किया गया, जो केवल 2000 साल पहले आया था, बाइबल कहती है कि परमेश्वर जिसने समय समय पर अलग तरह से भविष्यवक्ताओं द्वारा बातें की हैं, अंतिम दिनों में अपने पुत्र के द्वारा हम से बातें की हैं/

मैं यहाँ ये एक उदाहरण देना चाहता हूँ और भारत के मेरे मित्र उसकी सराहना करेगे, ये इस तरह से है/ हमारे एक नौकर पहली बार फ़िल्म देखने गए थे, वो थेयटर में गए और गलत दिशा में देख रहे थे, उन्होंने सोचा कि उन्होंने पैसे दिए कि दीवार के छेद से लाईट की किरण आती देखेने के लिए पैसे दिए हैं, फिर वो दाहिनी और मुड़े और देखा तो कहा हे मेरे प्रभु/ क्या देखता हूँ किसी का चेहरा है/

संसार की बहुत सी धार्मिक विचारधारा उन किरणों जैसे होगी,जो दीवार से आती हैं, फिर अंत में यीशु मसीह के व्यक्तित्व के चेहरे पर ये रौशनी चमकती है/ जिसमे सरे सत्य का सार और विवरण था/ संसार के दुसरे दृष्टिकोण में सत्य के बारे में थोड़ी जानकारी होगी, उसकी परिपूर्णता तो यीशु मसीह के व्यक्तित्व में है/ तो प्रोग्राम देखनेवाले दर्शकों से कहता हूँ,युहन्ना का सुसमाचार ले, इसे पढना शुरू कीजिए,देखिए ये यीशु के बारे में क्या कहता है/ आपके सवालों के लिए उसके जवाब देखिए,और आप उसके व्यक्तिव में सत्य का पूरा विवरण देखेगे/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  उस भाग के बारे में क्या, उन लोगों के बारे में क्या जो भूतकाल में रहे हैं, और उन्होंने यीशु पर विश्वास नही किया, क्या ये सही है या अन्याय है/ कि वो परमेश्वर से अनंतकाल के लिए अलग हो जाए?

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  हम उसे कैसे भी जवाब दे, जवाब का सबसे महत्वपूर्ण भाग तो ये होगा, बाइबल कहती है कि सारी पृथ्वी का न्यायी वही करेगा जो सही है/ ये दिलचस्प है ये वाक्य सदोम और अमोरा पर आनेवाले के समय आया था, परमेश्वर आप और मुझ से ज्यादा न्यायी है, परमेश्वर वो करेगा जो सही है/ लेकिन ये ऐतिहासिक रूप में ये भी बताता है कि अब्राहम क्या जानता था, वो बहुत आस्था की परम्परा में बढ़ा था, लेकिन उसने उस नगर को देखा जिसका बनानेवाला परमेश्वर था/ वो ये विचार कहाँ से लेकर आया?

परमेश्वर हम से बातें करता है, हमारे विवेक में ही/ परमेश्वर हमारे जीवन के व्यक्तिगत समय में हम से बातें करता है/ सच्चाई तो ये है की वो विवेक से बातें करता है, सृष्टि से बातें करता  है, और वो अपने वचन के द्वारा बातें करता है और अंत में यीशु के रूप में आने के द्वारा/  

ये कहते हुए कि परमेश्वर किसी को नर्क में नही भेजता, जॉन, ये बहुत महत्वपूर्ण सत्य है/ हम अपना चुनाव करते हैं/

सी एस लुईस ने कहा की इस संसार में दो तरह के लोग होते हैं, जो परमेश्वर के सामने अपने घुटने टेककर उससे कहते हैं, तेरी इच्छा पूरी हो, और वो लोग जो परमेश्वर के सामने घुटना टेकने से इनकार करते हैं, और परमेश्वर उससे कहता है, तुम्हारी इच्छा पूरी हो/ अवश्य ही अनन्तकाल के लिए जो चुनाव हम करते हैं, तो हमारी इच्छा को समर्पित करने से होता है/ हमारे स्वर्गीय पिता को, वो हमारी इच्छा नही तोड़ेगा, यहाँ तक कि स्वर्ग उस व्यक्ति को नही रख सकता जो परमेश्वर के साथ अनंतकाल नही बिताना चाहता है/ मेरी आज़ादी का वो बहुमूल्य वरदान तो मुझे परमेश्वर ने दिया है/ मैं दर्शकों को न्योता देता हूँ कि अपने घुटने टेके और उससे कहे, तेरी इच्छा पूरी हो/ उसकी इच्छा तो सवसे सुंदर चीज़ है जिसके पीछे आप चल सकते हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  हम परमेश्वर के बारे में देखेगे मुश्किल सवाल विद्यार्थियों से, यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों से/ पुर्वीय विद्यार्थियों से/ ठीक है, ये सवाल पूछा गया, हो सकता है रवि कि हम सब परमेश्वर हो, शायद हम सब मिलकर परमेश्वर हो/ और परमेश्वर चाहे वो स्त्री हो, पुरुष हो, वस्तु हो अपने आप को हमारे द्वारा महसूस करता है/ कुछ भी सिद्ध नही है/ बहुतसी आस्थाएँ हैं, बहुत से लोग हैं, जिन्होंने पहले परमेश्वर के पुत्र होने का दावा किया है/ मसीहियत एक ऐतिहासिक एक्सीडेंट है/ शिक्षक ने इसी तरह की बात सिखाई, कन्फ्यूशिअस और दुसरे लोगों ने भी, याने वो एक ही बात सिखाते हैं, क्या हम सच में बता सकते हैं की क्या सही है और क्या गलत है?

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  जानते हैं मैं ये सवाल अलग अलग रूप में सुनता हूँ, कईबार सुनता हूँ और सोचता हूँ कि कहाँ से शुरू करूं, मुझे विन्स्टन चर्चिल का वाक्य याद आता है/ उनके एक विरोधी उनके कारण परेशान होकर उन्हें हर तरह से भला बुरा कहने लगे, और जब उन्होंने कहना खत्म किया, चर्चिल अपनी बगलवाले व्यक्ति की और झुककर कहने लगे, यहाँ परमेश्वर के अनुग्रह के साथ परमेश्वर है/

जानते हैं जिस तरह से हम व्यवहार करते हैं, ये मुझे केवल आलौकिक बात दिखता है/ याने जब आप कहते हैं उदाहरण के लिए की कन्फ्यूशियस ने यही बात कही/ नही ऐसी बात नही सच में कन्फ्यूशिअस ने मनुष्य जाती की आठ भलाई पर विश्वास किया/ और यीशु ने कहा की हम सब पापी हैं, आप कहेगे कि शिक्षक ने यही बात सिखाई, नही ऐसा नही, शायद वो नास्तिक न हो पर आस्था ही नही रखते हैं, उन्होंने परमेश्वर के अस्तित्व के बारे में कुछ भी नही कहा, सिदधता का पूरा विचार इस दशा तक पहुंचना था कि कोई इच्छा और मांग न रहे, और यीशु ने कहा कि धार्मिकता के लिए भूखे और प्यासे हो जाएं/ और इस तरह से हम भरे जाते हैं/ याने यहाँ पूरी तरह से विरोधी विचारधारा हैं/

कुछ आस्था ये दावा करती है कि यीशु कभी क्रूस पर मरा ही नही था, ऐसे दिखाई दिया कि वो क्रूस पर मारा गया, ये तो ऐतिहासिक रूप में इसे हर बीती बात और आस्था से चुनौती पाया है/ चाहे दूसरे इतिहासकार देखीए, ग्रीक इतिहासकार, रोमी इतिहासकार, यहूदी इतिहासकार, मसीही इतिहासकार, ये सब यही बताते हैं कि वो क्रूस पर मरा/ और ये अंत में ये दावा है कि वो मुर्दों में से जी उठा/ याने ये आस्थाएँ एक ही बात नही कहती हैं/

एक और उदाहरण लेते हैं, यदि आप अविश्वासी से पूछे कि मुक्ति कैसे पाएगे, या कहिए कि छडाए जाएगे, तो वो कहेगे कि ये तो जब आप अपने सारे कर्म चुका देगे, कर्ज, हर जन्म फिर जन्म लेना है/ ये अपने आप में अलग है, बाइबल कहती है, कि मनुष्य के लिए एक बार मरना नियुक्त है, लेकिन जब आप अपने काम करते हैं/ यही वो हमें बताते हैं, और देखिए यहाँ अलग अलग आस्था में अलग अलग विश्वास होता है/ ये तो सच में अलग दशा होती है/ यदि अविश्वासी से कहे कि स्वर्ग में कैसे जाएगे, तो वो कहेगे कि आपके भले कामों को बुरे कामों से तौला जाएगा/ ये तो इन बातों को देखने का अलग तरीका है/

यीशु मसीह उड़ाऊ पुत्र का दृष्टान्त बताता है/ उस लडके ने अपने पिता का इनकार किया, अपनी सम्पत्ति ली, उसे ले लेता है, और दूर देश में चले  जाता है/ और अंत में अपना जीवन पूरी तरह से बर्बाद करता है/ और मुड़ता है और अपने पिता के पास आना चाहता है, मेरे लिए जॉन, एक पुर्वीय व्यक्ति के रूप में इस कहानी को पढ़ते हुए पूरी तरह से चौंक जाता हूँ, पुर्वीय व्यक्ति सोचेगा, वो वापस आ रहा है उसके पिता क्या करेगे? वो कैसे भीतर आएगा, वो क्या कहेगा, जब, नही, नही, नही, यीशु याने पिता उठता है, और घर से बाहर जाता है, घर से बाहर जाता है, कि अपने बेटे से मिले/ जो आधे रास्ते में ही है/

कोई भी पुर्वीय बेटा या बेटी मुझे देख रहे हैं वो जानते हैं कि ये तो पुर्वीय पिता के विचार के बिलकुल उल्टा है/ पुर्वीय पिता अपेक्षा करता कि वो आकर शोक करे, और जो भी चाहे कर ले, नही वो जाकर अपने बेटे को गले लगता है और कहता है कि ये मेरा बेटा मर गया था अब जीवित हो गया, अनुग्रह और क्षमा का ये संदेश, ये संसार की सारी आस्थाओं में अलग ही है/ कि स्वर्गीय पिता आपके पीछे आता है, और जब आप वापस आते हैं, स्वर्गीय पिता आपको स्वीकार करता है/

क्षमा और अनुग्रह सुसमाचार की कहानी है/ ये सस्ती क्षमा नही है/ ये इस तरह से नही कि ठीक है मैंने तुम्हें माफ किया है/ इसके लिए सबसे प्रिय चीज़ लगी, क्रूस पर यीशु कई मृत्यु, कि सारा न्याय ले, सारा दर्द ले, कि आपको और मुझे माफी मिल सके/

सारी आस्थाएँ बुनियादी रूप में अलग हैं, और हो सकता है कि कुछ बातें समान दिखाई दे/ लेकिन बहुत सी आस्थाओं में ये नैतिकता की बातें हमारे उद्धार का जरिया होते हैं/ और मसीही विश्वास में ये आपके उद्धार का फल है/ हम इसे अपने भले कामों से नही पा सकते हैं/ हमें माफ किया गया है, और हमारे भले काम तो स्वर्गीय पिता ने हमें क्षमा किया है इसलिए उसकी सराहना की भावना में हम इसे करते हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  रवी, आपके पास और दो उदाहरण हैं जो आप दर्शकों को बताना चाहते हैं, उन्हें जो अलग तरह का दृष्टिकोण रखते हैं/

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  जी, एक बार ऐसे हुआ, और जगह थी, गेन्सवेल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरिडा में जॉन, हमने चर्चा पूरी की और, ये भाई चलकर आते हैं, ये अजीब है, हमने इसे विडियो में टेप किया है उसे देखने से हंसी आती है/ वो आगे आते हैं, माइक्रोफोन के पास आकर कहते हैं, मैं कैसे जानूंगा कि मैं अस्तित्व में हूँ/ और अवश्य ही आधे लोग चौके तो आधे हंसने लगे, सब लोग आगे झुक गए क्योंकि वो सोच रहे थे कि इस तरह के सवाल का जवाब कैसे दे सकते हैं/

तो मैंने उन्हें ये जवाब देते हुए कहा जो प्रोफेसर नेथन न्युयोर्क के प्रोफेसर कहते थे, जब विद्यार्थी इसे पूछते थे, वो अपना चश्मा पहनते हुए पूछते मैं क्या कहूँ कि कौन पूछ रहा है? सत्य की परीक्षा में, उन में से एक परीक्षा है इनकार न करने की परीक्षा/ आप अपने अस्तित्व का इनकार नही कर सकते हैं, उसी समय इसे निश्चित कहे बिना/ ये तो इस तरह से कहना है कि मैं हिन्दी का एक शब्द भी नही कह सकता हूँ/ जब कि आप ये कह रहे हैं आप सच में हिन्दी में ही इसे कह रहे हैं/

याने इस तरह के संसार के दृष्टिकोण में पहचान की कशमकश है चाबी है/ यहाँ मैं और आप ये संबंध है/ देखीए मनन करना तो हमने मैं को बढ़ाने में ले जाता है/ आप भीतर देखकर मनन करते हैं/ लेकिन इस बात कि सच्चाई ये है/ फिर भी वो आप से कहते हैं, कि इस मनन को हमें और किसी सचेतता की ओर फेर देना चाहिए/ सच्चाई के संसार में आप और मैं अलग व्यक्तित्व के रूप में जीते हैं/ इसलिए परमेश्वर के लिए भूख हो/ इसलिए बलिदान की बात इतनी जगह पर आती है/ इसलिए घुटने टेकने की बात आती है/ इसलिए भवन में भेंट ली जाती हैं/ ये तो अस्तित्व में रहनेवाली है, कि हम मैं और आप के संसार में जीते हैं/

और ये दिलचस्प है, मसीही संसार में, हम एकता के बारे नही देखते हैं, संगती के बारे में देखते हैं, जीवित परमेश्वर के साथ संगती और संबंध में, हम मैं और आप के संसार में हैं/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  आप के पास दूसरा उदाहारण भी है, जो उन से बातें करता है जो पूर्व में हैं, उस जवान बहन के बारे में बताइए जिन्होंने भारत के एक होटल में आप से बातें की थी/

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  ये तो बहुत अजीबसी कहानी है, जानते हैं जॉन, यदि आप मुझे १५-२० साल पहले पूछते तो मैंने कभी नही सोचा कि इस तरह से होगा, मैं दिल्ली में था, वहां एक अच्छी जगह पर रह रहा था, मेरी तबियत का ख्याल रखने की कोशिश कर रहा था,और इस बहन ने मेरे एक दोस्त के द्वारा मुझ से संपर्क किया, और उन्होंने कहा कि मैं आप से मिलना चाहती हूँ/ तो वो आती हैं और मुझे अपनी कहानी बताती है/ वो वहां एक बहुत ही सम्मानित जगह पर काम करती थी, और कहा, जानते हैं, मेरे माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध में शादी की/ मैंने नीची जातिवाले व्यक्ति से शादी की/ हमारा जीवन बहुत खुश था, फिर मुझे दूसरी काम में दूसरे शहर में भेजा गया, और उन्होंने मुझे शहर का नाम बताया/ वो अभी भी वही काम कर रही थी/

उन्होंने कहा कि जब मैं वहां थी, मैं और किसी संबंध में जुड़ गई, और मेरे पति को संदेह हुआ, क्योंकि मैंने किसी नीची जाती के आदमी से शादी की थी, हम परिवार खो बैठे, वो अपना परिवार खो बैठे, मैं अपना परिवार खो बैठी,अब मैं इस संबंध में जुड़ गई, वो मुझ पर संदेह करने लगे, और मुझे देखने लगे, और वो मुझ से कहते हैं, क्या ये सच है, पूरी कहानी, विवरण के साथ, जी, उन्होंने कहा कि तुम मेरे साथ ऐसे कैसे कर सकती हो? मैंने अपना  परिवार छोड़ दिया, सबकुछ छोड़ दिया और तुम ऐसा कर रही हो? वो उससे बहस करने लगी, उन्होंने कहा देखो यदि तुम मेरे पास नही आओगी, तो मेरी एक बिनती है, मैं कुछ समय के लिए जा रहा हूँ, और बाद में वापस आऊंगा, मैं अपना सिर तुम्हारे गोद में रखना चाहता हूँ केवल 30 मिनट के लिए, मैं वादा करता हूँ की तुम्हें स्पर्श नही करूंगा, और यदि तुम मुझे ये सौभाग्य दोगी तो वादा करता हूँ कि कभी परेशान नही करूंगा/

उसने सोचा कि ये अजीब सवाल है, वो वापस आता है, वो अपनी गोद में एक तकिया रखती है, वो लेटकर अपना सिर उसकी गोद में रखता है/ और केवल उसके चेहरे की और देखता है, कुछ पल बीतने के बाद वो बहुत आक्रमक हो जाता है, उसे दौरे पड़ते हैं, वो अकड़ने लगता है, उल्टियाँ करता है और बहुत बीमार होता है/ और क्या हुआ कि उसने आने से पहले चूहे मारने का जहर लिया था, और आत्महत्या करना चाहता था, वो मर जाता है/ उसे हॉस्पिटल ले जाते हैं/

वो अभी इससे हिल जाती है, उसके चेहरे से बता सकते थे, उसने कहा मैं बहुत जगह गई और अंत में याजक के पास गई, याजक ने मुझे बताया कि क्या कारण है, उन्होंने कहा कि पिछले जीवन में उन्होंने छोटी बच्ची का बलात्कार किया था, और ये उसका काम है और आप दोष भावना से आज़ाद होकर जी सकती हैं/

मैं वहां सामने बैठा हुआ पढ़ी-लिखी, अपर मिडल क्लास की बहन से ये कहानी सुन रहा था, मैंने पूछा क्या इसने काम किया? क्या आप ये सब भूल गई, उसने कहा नही, मैं नही भूल सकती, देखिए हम सब जानते हैं/

देखिए हम किसी भी तरह से अपने किसी भी काम से अपने उपर के इस कर्ज को बड़े काम करके चूका नही सकते हैं, जो हम सोचते हैं कि हमने चुकाने हैं, हम सब ये जानते हैं कि मेरे भले काम कभी मेरे बुरे कामों को पीछे नही छोड़ सकते हैं, यदि यीशु मसीह के सुसमाचार की सुन्दरता है/ जो क्षमा करता और आपके पास आता है, और कहता है कि समस्या तो भीतर में है, पाप ऐसा है जिसे हम पसंद नही करते/ ये परमेश्वर के विरुद्ध में बलवा करना है/ उद्देश खोना है/

जब मैंने यीशु मसीह को अपने जीवन में स्वीकार किया, 17 की उम्र में उसने सबकुछ नया बना दिया, अब मैं यहाँ हूँ आधी सदी के बाद में जॉन, यीशु मसीह से ज्यादा प्यार करता हूँ, पहले से ज्यादा/ इस बात तो को पहले से ज्यादा जानता हूँ कि उससे बाहर कोई जवाब नही है/ वो मुझे छुटकारा और उद्धार देता है/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  जैसे आप यीशु को जानते हैं, वैसे लोग यीशु को जानने की भूख रखते है, और वो दोषी महसूस करते हैं, उससे जो भूतकाल में से होकर गए हैं, और वो जानते हैं, कि भविष्य के लिए कोई आशा नही है/ वो सच में यीशु मसीह को जानना चाहते हैं, आप उन्हें अभी क्या करने की सलाह देगे, कि उसे जानने के करीबी संबंध में आए/

अपोलोजिस्ट रवी जकर्याह:  बहुत ही सरल है, हम शायद एक दूसरे जितने बुरे नही हैं, लेकिन पूरी तरह बुरे हैं/ परमेश्वर की दृष्टिकोण में, और वो हम से कहता हैं कि यदि कोई उसके पास आता है, वो उसे किसी तरह से बाहर नही निकलेगा, उसने अपने वचन में कहा है यदि तुम अपने पापों का अंगीकार करो, तो वो हमारे पापों को क्षमा करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है/ उसने कहा जब हम उसकी इच्छा के अधीन हो जाते हैं, वो हम में नया जन्म लाता है/

मैं ऐसे लोगों से कहता हूँ, आप जहाँ भी हैं अपने सिर झुकाए, एक सरल प्रार्थना है, ये आपके और परमेश्वर के बीच की बात है/ आप अपने घर जा सकते हैं, अपने घर के भीतर जाए, आप अपने डेस्क पर हो सकते हैं, अपनी कर में हो सकते हैं, आप उसके पासा सरल प्रार्थना के साथ आएं यीशु मसीह, मुझे तेरी जरूरत है मेरे प्रभु और उद्धारक के रूप में, मैं बिनती करता हूँ कि मुझे माफ कर, मुझे अपनी सन्तान बना, वो आपको क्षमा करेगा,यदि ये प्रार्थना इमानदारी से की है, ऐसे लोगों का समूह ढूढे जहाँ बाइबल का अध्यन किया जाता है/ बाइबल स्टडी में जुड़ जाएं, जहाँ बाइबल का प्रचार किया जाता है उस चर्च में जाए, युहन्ना का सुसमाचार पढ़े, एक दिन एक अध्याय से शुरू कीजिए,लेकिन समर्पण की सरल प्रार्थना के द्वारा/ आप जीवित परमेश्वर की सन्तान हो सकते हैं, यीशु ने किसी फिलोसोफर की और नही दर्शाया कि वो बताए कि उसके पास कैसे आएं/ उसने एक बच्चे के बारे में बताया/ उसने कहा तुम एक छोटे बच्चे जैसे हो, तो तुम जानोगे कि किस तरह से राज्य के वारिस हो/ और ये बच्चे जैसा, बचपन जैसे नही,बच्चे जैसा विश्वास और भरोसा है,वो आपको स्वीकार करेगा, उसने अपने वचन में इसका वादा किया है/ कि आपको क्षमा करे और आपको छुडाए/

डॉक्टर जॉन एन्करबर्ग:  अद्भुत है, दोस्तों मैं आशा करता हूँ कि आप इसे गंभीरता से लेगे, एक दिन मैंने यीशु को अपने जीवन में आने का न्योता दिया, और मैं जानता हूँ कि वो भीतर आया, और यदि आप उसे इमानदारी से कहेगे, तो आप जानेगे कि वो आपके जीवन में आया है, और वो आपको बदलने लगेगा, वो आपको ऐसी इच्छा देगा जो अभी आपके पास नही है, अपने ही बल में, वो बदलाव लाता है, इसलिए वो उद्धारक है, वो प्रभु है/

अगले हफ्ते हम देखेगे मुश्किल और महत्वपूर्ण सवाल, मध्य-पर्व के विद्यार्थियों से, आशा करता हूँ की आप हमारे साथ जुड़ जाएगे/

 

जॉन एन्करबर्ग शो

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கிறிஸ்தவராவது எப்படி

நீங்கள் எப்படி கிறிஸ்தவராக முடியும்? கிறிஸ்தவர் என்பவர் இயேசுவை நம்பி அவருடைய பாதையை பின்பற்றுகிறவனாக இருக்கிறான். நீங்கள் கிறிஸ்தவர் என்பதை அறிந்துகொள்ள வேதம் உங்களுக்கு நேர்த்தியான பதில்களை அளிக்கிறது. கிளிக் செய்யவும்.

ஆடியோ பைபிள்

சீர்திருத்த பாடநெறி